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पेगासस जासूसी : मौलिक अधिकारों की आत्मा पर गहरी चोट – मनोज चौहान

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य और सर्वोच्च न्यायालय में छत्तीसगढ़ सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता मनोज चौहान ने कहा है कि मोदी सरकार ने पेगासस के माध्यम से संवैधानिक संस्थाओं में पदासीन अति महत्वपूर्ण लोगों, विपक्ष के नेताओं और मीडिया से जुड़े लोगों की जासूसी कराकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार पर अतिक्रमण किया है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 352 और 359 के तहत राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा के बाद जब सारे मौलिक अधिकार निलम्बित हो जाते हैं तब भी अनुच्छेद 20 और 21 में प्रदत्त मौलिक अधिकार निलम्बित नहीं होते। भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त निजता के इस अधिकार की महत्ता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय आपात के दौरान भी यह मौलिक अधिकार अपने अस्तित्व में बना रहता है।

मनोज चौहान ने आगे कहा कि पेगासस के माध्यम से जासूसी कराकर मोदी सरकार ने भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों की आत्मा पर गहरी चोट पहुंचाई है, इसीलिए कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राहुल गांधी ने मोदी सरकार के इस शर्मनाक कृत्य को राजद्रोह की संज्ञा दी है। इस पूरी जासूसी प्रक्रिया की बिना किसी देरी किये सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

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