सीधी

“सखा” ने मानवीय संबंधों पर किया गंभीर विमर्श

• काली खप्पर नृत्य ने बिखेरी बघेली लोकसंस्कृति की अद्भुत छटाभजन गायन में गौरव राजपूत की प्रस्तुति ने बांधा भक्तिमय समां

संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय बहुभाषीय नाट्य महोत्सव 2026 के द्वितीय दिवस में नाटक “सखा”, पारंपरिक “काली खप्पर नृत्य” एवं भजन गायन की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम प्रतिदिन शाम 07 बजे से विवेकानंद सभागार, टाटा कॉलेज परिसर सीधी मध्यप्रदेश में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अरविन्द श्रीवास्तव रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था संरक्षक डॉ. अनूप मिश्र ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात सर्वप्रथम मुक्ताकाशी मंच पर पारंपरिक अनुष्ठान एवं हवन-पूजन के साथ “काली खप्पर नृत्य” की प्रस्तुति दी गई। इन्द्रवती लोक कला ग्राम हस्तिनापुर द्वारा प्रस्तुत इस लोकनृत्य ने बघेली लोकसंस्कृति और पारंपरिक आस्था की अद्भुत छटा बिखेरी। प्रस्तुति संयोजन श्री मनिराज कोल के निर्देशन में कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, लोकधुनों और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के माध्यम से दर्शकों को लोकजीवन की जीवंत अनुभूति कराई। काली खप्पर नृत्य में मनिराज कोल, छोटेलाल रावत, इंदल कोल, कृष्णा कोल, प्रदीप प्रजापति, रज्जन कोल, शंकर कोल, मंशू कोल, कुसुमकली कोल तथा मुन्नी कोल ने प्रभावशाली प्रस्तुति दी। इसके बाद गणेश वंदना एवं राम भजन गायन की प्रस्तुति ने पूरे सभागार को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। जबलपुर के गौरव राजपूत ने अपनी मधुर एवं भावपूर्ण गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। हारमोनियम पर सृजन मिश्र एवं तबले पर समर्थ चौहान ने संगत देकर प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बनाया। दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुति पर तालियों से उत्साहवर्धन किया। इसके पश्चात दिल्ली की संस्था अछिन्जल द्वारा हिन्दी/मैथिली भाषा के नाटक “सखा” की प्रस्तुति दी गई। लगभग 70 मिनट की इस प्रस्तुति का लेखन एवं निर्देशन काश्यप कमल ने किया। मंच पर काश्यप कमल एवं सुनीता झा ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। नाटक ने मानवीय संबंधों, दाम्पत्य, मित्रता और सामाजिक संवेदनाओं के जटिल प्रश्नों पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत किया।नाटक “सखा” ने जीवन की त्रासदियों, मानवीय संघर्षों और रिश्तों के भीतर पनपते द्वंद्व को केंद्र में रखते हुए समाज को नई दृष्टि देने का प्रयास किया। प्रस्तुति का मुख्य भाव स्त्री और पुरुष संबंधों की नई परिभाषा गढ़ना रहा, जिसमें दाम्पत्य और मित्रता के मानवीय गुणों का समिश्रण दिखाई दिया। प्रस्तुति में प्रशांत कुमार मंडल द्वारा संगीत संचालन किया गया, जबकि रजनीश द्वारा प्रकाश संचालन एवं प्रजीत कुमार साकेत द्वारा मंच व्यवस्था का दायित्व निभाया गया। तकनीकी पक्षों के संतुलित समन्वय ने नाटक की प्रभावशीलता को और अधिक सशक्त बनाया। कार्यक्रम में आयोजन समिति से नीरज कुंदेर, रोशनी प्रसाद मिश्र, गौरव अवधिया, अखिलेश चतुर्वेदी, प्रवीण सिंह, रजनीश जायसवाल, प्रजीत साकेत, श्रवण मिश्र, सृजन मिश्र, अनुभूति कुंदेर, अभिनय कुंदेर, प्रहलाद कुमार मिश्र, प्रियांशु मिश्र एवं प्रकाश मिश्र की उपस्थिति रही। साथ ही शहर के कई गणमान्य नागरिक एवं सुधी दर्शक कार्यक्रम में उपस्थित रहे। आयोजन में सिद्धभूमि इंटरनेशनल स्कूल पनवार सीधी, रमा बल्देव पैलेस सीधी, एक्सट्रीम आर्ट एंड एजुकेशनल सोसायटी सीधी तथा टाटा कॉलेज सीधी का विशेष सहयोग रहा।

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