रामनवमी पर जयकारों से गूंजी मोहनिया घाटी

सीधी मौहनिया नाथ, मोहनिया घाटी स्थित सिद्ध प्राचीन हनुमान जी मंदिर प्रांगण में आज रामनवमी के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। “जय सीताराम”, “जय-जय राम” और “जय-जय हनुमान” के गगनभेदी जयकारों से पूरी मोहनिया घाटी गुंजायमान हो उठी। आयोजित श्रीराम कथा के पांचवें दिन कथा व्यास राष्ट्रीय कथा प्रवक्ता पं. आकाश जी महाराज ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं, विश्वामित्र यज्ञ रक्षा एवं अहिल्या उद्धार जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मुनि विश्वामित्र के यज्ञ में राक्षसों द्वारा लगातार विघ्न डाले जाते थे। ध्यान के माध्यम से उन्हें ज्ञात हुआ कि भगवान श्रीराम ही विष्णु अवतार हैं और उन्हीं के द्वारा राक्षसों का संहार संभव है। राजा दशरथ से भगवान राम और लक्ष्मण को यज्ञ की रक्षा हेतु मांगा गया। वन मार्ग में भगवान श्रीराम ने ताड़का जैसी भयंकर राक्षसी का वध कर अन्य राक्षसों का भी संहार किया और यज्ञ को सफलतापूर्वक पूर्ण कराया। इसी यात्रा के दौरान भगवान श्रीराम ने गौतम ऋषि के श्राप से शिला बनी अहिल्या का अपने चरण स्पर्श से उद्धार किया। तत्पश्चात वे जनकपुर पहुंचे। आयोजन समिति के कोषाध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा एवं मीडिया प्रभारी अमनराज त्रिपाठी ने बताया कि आगामी कथा में धनुष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद एवं श्रीराम-जानकी विवाह का मनोहारी वर्णन किया जाएगा।जनप्रतिनिधियों व श्रद्धालुओं की उपस्थिति-कार्यक्रम में चुरहट विधायक अजय सिंह राहुल, पूर्व सांसद गोविंद मिश्र, अनेन्द्र राजन मिश्र, नरेन्द्र पटेल, सुदर्शन साकेत, शिवेंद्र सिंह सिब्बू सहित क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। रीवा, मऊगंज, सीधी और चुरहट क्षेत्र से आए श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान कर भक्ति में सराबोर होकर आनंद लिया। मंदिर के व्यवस्थापक पुजारी शैलेन्द्र तिवारी एवं पुजारी बालेन्द्र तिवारी ने आयोजन की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।




