सीधी

टेट से मुक्ति एवं आरटीई एक्ट में संशोधन हेतु शिक्षक कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

मध्यप्रदेश शिक्षक कांग्रेस जिला-सीधी के बैनर तले जिलाध्यक्ष कृपाशंकर मिश्र के नेतृत्व में प्रान्तव्यापी आह्वान पर दिनांक 16 जून 2026 को शिक्षा का अधिकार अधिनियम के संशोधित भाग 2017 में पुनः आवश्यक विधायी संशोधन कर 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को अनिवार्य पात्रता परीक्षा से मुक्त रखे जाने के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री के नाम सम्बोधित ज्ञापन कलेक्टर सीधी को सौंपा गया। बतौर कलेक्टर प्रतिनिधि नायब तहसीलदार सुश्री एकता शुक्ला द्वारा ज्ञापन प्राप्त किया गया। शिक्षकों की मांग है कि केंद्र सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2010 के पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा से मुक्त रखा जाए। शिक्षा का अधिकार अधिनियम वर्ष 2017 में संशोधन कर भूतलक्षी प्रभाव से 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया गया। यह देश का पहला कानून होगा जो कानून बनने के पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर भूतलक्षी प्रभाव से लागू किया गया। मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस मांग करता है कि केंद्र सरकार शिक्षकों पर सहानुभूति पूर्वक रवैया अपनाते हुए सेवा सुरक्षा, दीर्घकालीन अनुभव का सम्मान करते हुए उनके इस लंबे व्यावहारिक शैक्षणिक अनुभव को ही पात्रता का मुख्य आधार मानते हुए पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से छूट प्रदान की जाए। प्रभावित होने वाले शिक्षकों में अधिकतर शिक्षक वर्तमान में 45 से 55 वर्ष की आयु वर्ग में है सेवानिवृत्ति के इस पड़ाव में आकर अकादमिक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने का दबाव उनके लिए भारी मानसिक प्रताड़ना और सामाजिक असुरक्षा का कारण बन रहा है। इन शिक्षकों ने जीवन का बहुमूल्य दशक देश के नौनिहालों के भविष्य निर्माण, जनगणना और अन्य महत्वपूर्ण शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लगाए हैं। जिस प्रकार पूर्व में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) में संशोधन कर अप्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए विशेष समय और राहत दी गई थी। ठीक उसी प्रकार केंद्र सरकार को संसद के माध्यम से एक विशेष संशोधन करना चाहिए ताकि पुराने अनुभवी शिक्षकों के सेवा अधिकारों की रक्षा हो सके। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद एनसीटीई द्वारा वर्ष 2010 में टीईटी को न्यूनतम योग्यता घोषित किया गया। इससे पूर्व नियुक्त शिक्षक तात्कालिक भर्ती नियमों और चयन प्रक्रियाओं के तहत पूरी तरह वैध रूप से नियुक्त हुए थे बाद में बने नियमों को उन पर भूतलक्षी रूप से लागू करना सर्वथा अनुचित है।ज्ञापन देने वाले शिक्षकों में प्रमुख रूप से अशोक कुमार शर्मा प्रदीप तिवारी आरके उपाध्याय अभिनेंद्र कुमार पांडे अशोक कुमार मिश्रा संजय तिवारी राजेंद्र सिंह उमेश कुमार द्विवेदी मुकेश द्विवेदी राम नारायण शुक्ला चंद्रेश प्रसाद यादव लालजी कोल अरुण कुमार मिश्रा मधुर मिश्रा ज्योतिमा शुक्ला हरीश पांडे मोनिका शुक्ला यमुना धर द्विवेदी वीणा तिवारी अर्पणा मिश्रा सत्यवती कुशवाहा सावित्री देवी प्रजापति संतोष कुमार सिंह चन्दमौलि पांडे कौशल प्रसाद द्विवेदी प्रवीण पांडे मुस्ताक अहमद कादरी सुनीता केवट हुब्बलाल केवट शीलध्वज गुप्ता आदि शिक्षक शामिल रहे।

Related Articles

Back to top button