सीधी

कांग्रेस अध्यक्ष ज्ञान सिंह ने जन चौपाल में सुनी ग्रामीणों की समस्याएं, नौढ़िया में किया रात्रि विश्राम

सीधी जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ज्ञान सिंह ने धौहनी विधानसभा क्षेत्र में जनसंपर्क को प्राथमिकता देते हुए ग्राम नौढ़िया में आयोजित जन-चौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके समाधान के लिए हर संभव प्रयास का भरोसा दिलाया। जन-चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल आपूर्ति एवं कृषि से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। साथ ही क्षेत्र के विकास को लेकर अपने सुझाव भी साझा किए। जिला अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा आमजन की आवाज को प्राथमिकता देती है और इन मुद्दों को संबंधित स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा।जन-चौपाल के उपरांत ज्ञान सिंह ने ग्राम नौढ़िया में अजय सिंह अज्जू के निवास पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों के साथ रात्रि भोज किया तथा वहीं रात्रि विश्राम भी किया। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ संगठनात्मक मजबूती और आगामी रणनीतियों पर अनौपचारिक चर्चा की। इससे पूर्व उन्होंने धौहनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चुवाही में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मझौली के नवनियुक्त पदाधिकारियों की परिचय बैठक में सहभागिता की। बैठक में सभी पदाधिकारियों पंचायत कमेटियों से परिचय प्राप्त कर संगठन को मजबूत बनाने, जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देने तथा कांग्रेस की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए संगठन को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। कार्यक्रम में ज्ञानेंद्र अग्निहोत्री, श्यामवती सिंह, तिलकराज सिंह, गणेश सोनी, इंद्रबली सिंह, अभयराज सिंह, सुनील सिंह, प्रदीप दीक्षित, बीरन बैगा, जगतभान यादव, मार्तण्ड चतुर्वेदी, चिंतामणि गुप्ता, अभिषेक सिंह, दिनकर सिंह, विनोद सिंह, हर्षित शुक्ला, अजय सिंह अज्जू, आनंद सिंह गोंड़ सहित अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।रात्रि विश्राम के दौरान मनरेगा के मजदूरों से मिलकर जानी वस्तुस्थिति-मनरेगा योजना का नाम बदलकर सरकार सिर्फ जनता को गुमराह करने का काम कर रही है। जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को योजना के तहत पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। रात्रि विश्राम के दौरान मेरी मनरेगा के मजदूर भाई-बहनों से विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें न तो नियमित रूप से काम मिल रहा है और न ही पहले किए गए कार्यों का समय पर भुगतान हो रहा है। कई मजदूरों का मेहनताना महीनों से लंबित है, जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। सरकार को चाहिए कि वह नाम बदलने की राजनीति छोड़कर जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान दे। मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना ग्रामीण गरीबों की जीवनरेखा है, इसे कमजोर करना या केवल दिखावे तक सीमित रखना निंदनीय है।

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