अन्र्तराष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस कार्यक्रम सम्पन्न

सीधी-नेहरू युवा केन्द्र सीधी ‘‘युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार‘‘ द्वारा अन्र्तराष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस कार्यक्रम दिनांक 05 दिसंबर को सीएम राइज स्कूल सेमरिया में वीणा वादिनी मां सरास्वती जी की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामसजीवन वर्मा समाज सेवी सेमरिया, अध्यक्ष अनिल कुमार मिश्रा प्राचार्य सीएम राइज स्कूल सेमरिया, विशिष्ट अतिथि डाॅ. सुनीता वर्मा शिक्षक, राममणि त्रिपाठी पी.टी.आई, अजीत कुमार सिंह मा. शिक्षक सेमरिया, अरूण प्रताप सिंह मा. शिक्षक देवगढ़ रहे। कार्यक्रम के आयोजक अर्जुन सिंह लेखा एवं कार्यक्रम पर्यवेक्षक द्वारा बताया गया कि संयुक्त राष्ट्र स्वंयसेवक (यूएनवी) राष्ट्रीय और संयुक्त राष्ट्र प्रणाली भागीदारों के साथ किए गए ठोस सामुदायिक स्वयंसेवक गतिविधियों के माध्यम से दुनिया भर में सामुदायो और संयुक्त राष्ट्र स्वयंसेवको की भलाई के लिए अपनी प्रतिबध्दता प्रदर्शित करता है।
अन्तर्राष्ट्रीय स्वंयसेवक दिवस, जिसे आमतौर पर आई.व्ही.डी. के नाम से जाना जाता है हर साल 5 दिसंबर को मनाया जाता है। इसकी शुरूआत 1985 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अनिवार्य एक अंतर्राष्ट्रीय पालन के रूप में की गई थी। यह एक ऐसा दिन है जहां स्वयंसेवको को स्वीकार किया जाता है। और स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वयंसेवा की भावना को बढ़ावा दिया जाता है। इसी तारतम्य में रामसजीवन वर्मा समाज सेवी सेमरिया को साल एवं श्रीफल से सम्मानित किया गया ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामसजीवन वर्मा समाज सेवी द्वारा स्वयंसेवक वह होता है जो समाज की सेवा करता है युवा उर्जावान होता है आप में से जिसकी इच्छा समाज सेवा की होती है। वह आदमी आगे आकर के समाज सेवा की बागदौड़ अपने हांथों में रख कर चलता है जिस तरह से सूर्य को दिन में चलना है और चन्द्रमा को रात में चलना है वो निरन्तर चलते रहते हैं अपने कर्तव्य पथ पर बिना लाभ हानि के चलते रहते है उसी प्रकार स्वयंसेवक अपने पथ पर चलते रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अनिल कुमार मिश्रा प्राचार्य सीएम राइज स्कूल द्वारा कहा गया कि उपस्थित लोग जो कि कुछ दबाव में बैठे है कुछ इच्छा से बैठे है कुछ समाज सेवा के भाव से बैठे है आज के युवा समाज के उत्थान में अपना योगदान देते रहे साथ ही युवा में पुस्तकीय ज्ञान के साथ साथ व्यवहारिक ज्ञान भी होना आवश्यक है इसी प्रकार विशिष्ट अतिथियों द्वारा अपने अपने विचार प्रकट किये गये आभार प्रदर्शन रावेन्द्र कुमार प्रजापति द्वारा किया गया।



