महाकुंभ 2025

143 साल पहले मात्र 20 हजार रुपये में हुआ था महाकुंभ का आयोजन

सनातन सभ्यता के सबसे बड़े पर्व में से एक महाकुंभ के शुभारंभ में महज 15 दिन का ही समय रह गया है. ऐसे में मेले को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में है. वहीं राज्य की योगी सरकार भी इस बार के कुंभ में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है. इसलिए खुद सीएम योगी आदित्यनाथ सारी व्यवस्था पर नजर रखे हुए हैं. लल्लूराम डॉट कॉम के महाकुंभ महाकवरेज की इस कड़ी में अब हम आपको कुंभ के खर्च के बारे में बताएंगे. जिससे आप अंदाजा लगा सकेंगे कि तब के और अब के खर्च में कितना फर्क आया है.

महाकुंभ सनातन संस्कृति के सबसे बड़े पर्व में से एक है. जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. जाहिर है कि उस हिसाब से व्यवस्था भी की जाती है. जिसके लिए अच्छी खासी धनराशि भी खर्च होती है. पहले कुंभ का खर्च इतना नहीं होता था जो आज होता है. पहले के खर्च के बारे आप जानेंगे तो आप चौंक जाएंगे. आपको जानकर हैरानी होगी कि पहले महाकुंभ का सारा आयोजन महज 20 हजार रुपये में हो जाता था. हालांकि उस समय के हिसाब से ये भी बहुत बड़ी राशि थी. लेकिन यदि आज के हिसाब से देखें तो ऐसे आयोजनों के लिए 20 हजार बहुत बड़ी रकम नहीं होती है.

20 हजार रुपये में हुआ था महाकुंभ का आयोजन

  • 1882 के महाकुंभ में करीब 8 लाख श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान किया था. उस समय भारत की कुल जनसंख्या 22.5 करोड़ थी. तब कुंभ का खर्च कुल 20 हजार 288 रुपये था. यानी आज के हिसाब से करीब 3.6 करोड़ रुपये.
  • 1894 के महाकुंभ का आयोजन हुआ. जिसमें 10 लाख श्रद्धालु पहुंचे. इस समय 69 हजार 427 रुपये (10.5 करोड़ रुपये) का खर्च आया.
  • 1906 के कुंभ में करीब 25 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे. जिसमें 90 हजार रुपये (13.5 करोड़ रुपये) का खर्च आया था.
  • 1918 के महाकुंभ में 30 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया था. जिसमें 1.4 लाख रुपये (16.4 करोड़ रुपये) का खर्च आया था.
  • 2013 के कुंभ के आयोजन में कुल 1300 करोड़ रुपये का खर्च आया था.
  • 2019 में हुए अर्धकुंभ में 4200 करोड़ रुपये खर्च हुए थे.
  • अब हो महाकुंभ (Mahakumbh 2025) होने जा रहा है उसमें सरकार ने 7500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है. इस बार के कुंभ में 40 से 50 करोड़ लोगों के आने की संभावना है.

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