सीधी

पूजा पार्क की राम कथा का चौथा दिवस 

भगवान की कथा प्रेम का विषय है व्यवहार का नही- पं बाला व्यंकटेश 
सीधी में स्थित पूजापार्क की श्री रामकथा के सुपरिचित कथा प्रवक्ता पं बाला व्यंकटेश महराज वृन्दावनोपासक ने समुपस्थित श्रोताओं को बताया कि प्रेमी की दृष्टि में भगवान श्री राम का प्रगटोत्सव हुआ है किन्तु ज्ञानी की दृष्टि में ब्रम्ह अजर अमर है। राम प्रगटोत्सव के प्रसंग को आरेखित करते हुए महराज जी ने कहा कि राघव को बधाई देने के लिए नर नारी तो आईं ही साथ में सरजू मैया जी तक श्यामले सलोने की किलकारी सुनने को प्रगट हो गईं। राम की बाल लीला का ऐसा वर्णन व्यास जी ने किया मानो सीधी के मंच पर समूचा लोक और लोकाचार आ गया हो। राम के प्रगटोत्सव में जिस लोक रीति, लोक नीति, लोकमान्यता, लोकआस्था और लोकमंगल को अनुकरणीय प्रस्तुत किया गया उसे यह प्रमाणित हो गया कि रामकथा में ही भारतीय ज्ञान परम्परा आधारित है। महराज जी ने बताया कि भगवान राम के आने से सभी प्रसन्न हुए लेकिन चन्द्रमा रोने लगा। चन्द्रमा ने कहा कि सूर्य को कहिए कि अपना रथ आगे बढायें तब तो हम आपके रूप रस का पान कर सकें। भगवान ने कहा कि मेरा भी जन्म सूर्यवंश में हुआ है इसलिए सूर्य के रथ को इधर उधर करना संभव नही किन्तु अगले जन्म में मैं जब आऊॅगा तब अपने नाम के आगे सूर्यवंशी होते हुए भी चन्द्र लगाऊॅगा और सारा जगत मुझे रामचन्द्र के नाम से जानेंगे। इतना सुनकर चन्द्रमा बहुत प्रसन्न हुआ और कहा हे नाथ आपने मुझे तो सब कुछ देदिया। कथा प्रसंग के आगे महराज जी ने कहा कि एक बार कागभुसुण्डी से कहा गुरुदेव मेरा हाथ मत छोड़ना नही भगवान के पास जाने पर भी भटक जाऊँगा। ऐसा कहकर कागभुसुण्डी ने गुरुदेव जी के चरण पकड़ लिये। इसीलिए कहा गया है कि हाथ साथ और पाथ यदि मिल जाय तो गुरुदेव के माध्यम से भगवान का दर्शन मिल जाता है। अतएव यह भजन भाव सार्थक तब हुआ जब कागभुसुण्डी ने कहा कि पकड़ लो हाथ बनबारी नही मैं डूब जाऊँगा। कथा के पूर्व लालमणि सिंह चौहान बरिष्ठ अधिवक्ता, मुकुटधारी सिंह पूर्व सीएमओ, श्रीमती कुमुदिनी सिंह, डाॅ लहरी सिंह, डाॅ रामसुशील शुक्ल तथा डाॅ श्रीनिवास शुक्ल सरस आदि ने कथा व्यास बाला व्यंकटेश महराज जी का अभिनंदन किया। आगे की कथा में महराज जी ने कहा कि मानव तन की सार्थकता भगवद दर्शन में है। इसी दर्शन से भवसागर से पार होना संभव होगा। कथा में बाललीला का वर्णन करते हुए कथा प्रवक्ता ने यह भी उद्घाटित किया कि यदि श्री रामजी के नेत्र से नेत्र मिल गये तो फिर चित्रकूट अयोध्या और वृन्दावन ही याद आयेगा। अतएव मानव तन पाकर हमें यह प्रयास करना चाहिए कि राम की कृपा दृष्टि मुझ पर पड़ जाय तो मानव तन पाने की सार्थकता सिद्ध हो जाय। महराज जी ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि भगवान की कथा प्रेम की है व्यवहार की नही।

श्रीराम कथा के प्रसंग के बीच बीच में श्री राम पर केन्द्रित रोचक तथ मनमोहक भजन कीर्तन होते रहे। पूजा पार्क में समुपस्थित रसज्ञ श्रोतागण राममय वातावरण में नाचते कूदते हुए श्री राम की बाल लीला का रसास्वादन करते रहे। पूजा पार्क की यह नौ दिवसीय राम कथा 11 जनवरी तक अविरल 2 बजे से 6 बजे तक चलती रहेगी।

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