सरकार की नीतियों और प्राकृतिक आपदाओं की दोहरी मार से किसान टूट चुका – कमलेश्वर पटेल

किसानों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने दिया धरना
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया 9 मांगों का ज्ञापन

प्रदेश का किसान आज गहरे संकट में है। सरकार की नीतियों और प्राकृतिक आपदाओं की दोहरी मार से किसान टूट चुका है। जब तक किसानों को उनका हक़ और सम्मान नहीं मिलेगा, कांग्रेस पार्टी उनकी आवाज बुलंद करती रहेगी। यह बातें आज कलेक्ट्रेट के सामने वीथिका भवन प्रांगण में कांग्रेस की ओर से आयोजित विशाल धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीडब्ल्यूसी सदस्य एवं प्रदेश के पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कही। सीधी, सिहावल, सिंगरौली सहित पूरे रीवा और शहडोल संभाग के किसानों की समस्याओं को लेकर पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल के नेतृत्व में विशाल धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस आंदोलन में हजारों की संख्या में किसान साथी शामिल हुए, जिन्होंने भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर आवाज उठाई। प्रदर्शन के बाद कमलेश्वर पटेल ने एडीएम सीधी को मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा। सौंपे गए ज्ञापन में शामिल 9 सूत्रीय मांगों में प्रदेश के किसानों की ज्वलंत समस्याओं और उनकी मांगों को विस्तार से रखा गया। ज्ञापन में शामिल मांगों में साइक्लोन मोंथा से प्रभावित सभी क्षेत्रों में तत्काल विस्तृत सर्वे कर प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा और राहत राशि प्रदान की जाए। जिन किसानों पर कर्ज का बोझ है उनके ऋण पर तत्काल मोराटोरियम लगाया जाए ताकि वे पुन: खेती आरंभ कर सकें। प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता के साथ खाद, बीज और कृषि उपकरण उपलब्ध कराए जाएँ। केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की घोषणा कराई जाए ताकि प्रदेश के किसानों को शीघ्र आर्थिक सहायता मिले। किसानों पर मनमाने एवं अत्यधिक बिजली बिलों की वसूली पर तत्काल रोक लगाई जाए और नियमित, पारदर्शी बिल प्रणाली लागू की जाए। राज्य सरकार स्वयं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद सुनिश्चित करेय किसानों की उपज एफसीआई द्वारा न खरीदी जाए। आवारा पशुओं से फसलों को बचाने हेतु उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए। बाणसागर नहरों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए ताकि सिंचाई जल प्रवाह बाधित न हो। भूमिहीन किसानों का विधिवत सर्वे कर उन्हें भी सरकारी योजनाओं एवं फसल मुआवजे में शामिल किया जाए। कांग्रेस की ओर से आज वीथिका भवन में सुबह करीब 11 बजे से धरना प्रदर्शन आंदोलन का आयोजन किया गया था। धरना प्रदर्शन का दौर लगातार शाम करीब 7 बजे तक चलता रहा। इस दौरान समूचा वीथिका भवन परिसर भीड़ से खचाखच भरा हुआ था। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से प्रदेश के किसानों की परेशानियों को लेकर आयोजित किया गया था। धरना में शामिल अन्य वक्ताओं का भी कहना था कि वर्तमान में किसान प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है। फिर भी समय पर बिजली नहीं मिलना, बढ़े हुए बिजली बिलों का बोझ, खाद ओर बीज की कमी, सहकारी समितियों से अपने ही पैसों का भुगतान न होना, आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा का संकट गंभीर है।



