हिंसा, शोषण या अन्याय का शिकार बच्चे निःशुल्क सहायता प्राप्त करें-विशेष न्यायाधीश

म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रयाग लाल दिनकर के मार्गदर्शन में “न्यायोत्सव विधिक सेवा सप्ताह” (09 से 14 नवम्बर 2025) के अंतर्गत गुरुवार दिनांक 13 नवम्बर 2025 को पाँचवें दिन विशेष विधिक जागरूकता एवं निरीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वन स्टॉप सेंटर, मूक-बधिर छात्रावास मधुरी एवं अरुणोदय बालगृह में आयोजित हुआ, जिसमें विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) उर्मिला यादव, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीधी मुकेश कुमार शिवहरे तथा जिला विधिक सहायता अधिकारी मनीष कौशिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को उनके संवैधानिक अधिकारों तथा विभिन्न विधिक योजनाओं के बारे में जागरूक करते हुए उन्हें सशक्त बनाना था।विशेष न्यायाधीश उर्मिला यादव ने बच्चों को पॉक्सो अधिनियम, घरेलू हिंसा अधिनियम, बाल अधिकार संरक्षण कानून, दहेज प्रताड़ना एवं विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि कोई बच्चा किसी प्रकार की हिंसा, शोषण या अन्याय का शिकार हो, तो वह चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 1091, या नालसा हेल्पलाइन 15100 से निःशुल्क सहायता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़ित प्रतिकर योजना तथा नालसा लैंगिक हमलों/अन्य अपराधों की पीड़िताओं हेतु प्रतिकर योजना 2018 के तहत पात्र पीड़ितों को प्रतिकर राशि प्रदान की जाती है।सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीधी मुकेश कुमार शिवहरे ने कहा कि हर बच्चा और हर महिला समाज की रीढ़ हैं। उन्हें भयमुक्त जीवन, समान अवसर और न्याय की गारंटी देना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सदैव समाज के वंचित, पीड़ित एवं शोषित वर्गों तक न्याय पहुँचाने के लिए तत्पर है। जिला विधिक सहायता अधिकारी मनीष कौशिक ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज में कोई बच्चा, महिला या नागरिक अपने अधिकारों से वंचित न रहे। न्याय सबके लिए है और हम इसी संकल्प के साथ निरंतर कार्यरत हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग की सहायक संचालक अंजली पाण्डेय ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से सभी पीड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर छह प्रकार की आवश्यक सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। उन्होंने कहा कि सेंटर मध्यस्थता और परामर्श के माध्यम से पारिवारिक विवादों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। महिलाओं को आत्मरक्षा, आत्मविश्वास और न्याय प्राप्ति के उपायों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि दहेज प्रताड़ना, कार्यस्थल उत्पीड़न या घरेलू हिंसा जैसी स्थितियों में वे बिना भय के कानूनी सहायता प्राप्त कर सकती हैं।कार्यक्रम में सचिव मुकेश कुमार शिवहरे, जिला विधिक सहायता अधिकारी मनीष कौशिक, सहायक संचालक अंजली पाण्डेय, वन स्टॉप सेंटर की अधीक्षक तथा रूपेन्द्र मिश्रा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीधी उपस्थित रहे।



