पहले छह वर्षों में मस्तिष्क विकास पर फोकसः 8वां पोषण पखवाड़ा संपन्न

सीधी पोषण अभियान अंतर्गत जिले में 8वां “पोषण पखवाड़ा” 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया गया। इस दौरान जिले की सभी बाल विकास परियोजनाओं एवं आंगनवाड़ी केंद्रों में समुदाय आधारित गतिविधियों का व्यापक आयोजन किया गया, जिनकी प्रविष्टि भारत सरकार के जन आंदोलन पोर्टल पर की गई। कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ अन्य विभागों का भी समन्वय सुनिश्चित किया गया। इस वर्ष पखवाड़े की मुख्य थीम “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क का अधिकतम विकास” निर्धारित की गई। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, मानव मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास जन्म से 6 वर्ष की आयु तक होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पखवाड़े का उद्देश्य परिवारों एवं समुदायों में ऐसे व्यवहारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा, जो बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास को प्रोत्साहित करें। पखवाड़े के दौरान पांच प्रमुख गतिविधियों पर विशेष रूप से कार्य किया गया। इसमें मातृ एवं शिशु पोषण के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं की देखभाल, प्रसव पूर्व जांच एवं संतुलित आहार पर जोर दिया गया। वहीं 0 से 3 वर्ष तक के बच्चों के लिए संवाद, खेल एवं प्रतिक्रिया के माध्यम से मस्तिष्क विकास को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों में खेल आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित किया गया, ताकि बच्चे सहज रूप से सीख सकें। इसके साथ ही बच्चों के स्क्रीन टाइम को कम करने हेतु अभिभावकों एवं समुदाय को जागरूक किया गया। सशक्त आंगनवाड़ी निर्माण के लिए पंखुड़ी पोर्टल के माध्यम से सामुदायिक एवं सीएसआर सहयोग को भी बढ़ावा दिया गया। पोषण पखवाड़े के दौरान जिले भर में रैलियां, “पोषण पर चर्चा”, “दादी-नानी की जुबानी” जैसे कार्यक्रमों तथा खिलौना निर्माण कार्यशालाओं का आयोजन किया गया, जिससे इसे जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जा सका। पखवाड़े का शुभारंभ 9 अप्रैल 2026 को स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता के साथ प्रत्येक स्तर पर किया गया। साथ ही विभिन्न विभागों द्वारा पोषण एवं स्वास्थ्य से संबंधित गतिविधियां भी आयोजित की गईं। आयोजित सभी गतिविधियों की जानकारी पोषण अभियान के जन आंदोलन डैशबोर्ड पर निर्धारित समय-सीमा में अनिवार्य रूप से दर्ज की गई। जिला प्रशासन ने बताया कि इन प्रयासों से पोषण के प्रति जनजागरूकता में वृद्धि हो रही है और बच्चों के समग्र विकास के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार हो रहा है।



