सीधी

छठवे दिवस की कथा में रुक्मिणी विवाह का भव्य मंचन

  • ब्रज के सजीव महातीर्थ हैं गिरिराज महराज – पंडित बाला व्यंकटेश

सीधी शहर के शिवाजी नगर नौढिया में चल रही छठवे दिवस की श्रीमद्भागवत कथा के प्रसंग को विस्तार देते हुए देश एवं प्रदेश के बहु चर्चित एवं बहुप्रतिष्ठित कथा प्रवक्ता वृन्दावनोपासक पं. बाला व्यंकटेश शास्त्री महराज जी ने कहा कि ब्रज का प्रमुख महातीर्थ गिरिराज जी महराज है । जिसको कन्हैया अपनी लीला में प्रवेश कराना चाहते हैं उसको सात दिन पहले ही गोवर्द्धन का बास दे देते हैं। आगे व्यास जी ने बताया कि गिरिराज के कृपा की शीतलता गुरुरूपी कवच के माध्यम से ही संभव है। अतएव श्रीमद्भागवत का पुण्य लाभ पाने के लिए और श्रीकृष्ण की लीला में प्रवेश करने के लिए गुरु कवच आवश्यक है। महराज जी ने श्रोताओ को सम्बोधित करते हुए बताया कि जब गोवर्द्धन में गोप्यगीत का सस्वर पारायण होता था तब गिरिराज जी को स्वयं प्रगट होना पडता था। कथा प्रसंग के पूर्व व्यास पीठ की पूजा अर्चना एवं कथा प्रवक्ता पं. बाला व्यंकटेश महराज जी का माल्यार्पण से स्वागत वन्दन प्रमुख यजवान भोला सिंह बघेल, समर बहादुर सिंह बघेल, विनोद प्रताप तथा प्रमोद प्रताप सिंह बघेल शिवाजी नगर तथा उनके परिवार के सभी सदस्यों ने किया। महराज जी ने गिरिराज की तलहटी और गिरिराज जी की महिमा को प्रतिष्ठित करते हुए बताया कि हनुमान जी और गिरिराज जी आज भी साक्षात भगवान स्वरूप हैं। जो भी श्रद्धालु भक्तगण इस कलिकाल में भी निष्ठा और समर्पण भाव के साथ गिरिराज जी महराज का परिक्रमा लगाते हैं वे निश्चित ही मनोवांछित फल पाते हैं।श्रआगे व्यास जी ने कहा कि कलयुग के उपसंहार में गंगा और गोवर्द्धन इस मृत्युलोक को छोड़ देंगे ऐसा हमारे भागवत महराज जी की उद्घोषणा है। रोचक कथा में भांति भाॅति के उद्धरण, दृष्टान्त और कथानक सुनकर समुपस्थित श्रोतागण कथा के रहस्य को हृदयशात करते हुए मंत्रमुग्ध होते रहे। व्यास महराज जी ने यह भी बताया कि जब कन्हैया सात दिन, सात रात अपनी उंगलियों में गोवर्द्धन धारण किये तो ग्वाल वालों ने बैठक में यह निष्कर्ष निकाला कि यह नंद का लाला ही नही बल्कि कोई न कोई देवता है। यदि साधारण बालक होता तो इतने दिनों तक इतना विशाल पहार न धारण कर पाता। प्रसंग के माध्यम से आध्यात्म्य और सनातन संस्कृति के साथ ही साथ महराज जी एकता और अखण्डता को बनाये रखने का संदेश दिये और उन्होने कहा कि मानव मूल्य सामाजिक चेतना तथा नैतिक दायित्व का परिपालन करना भी मानव धर्म है। अतएव हम सबको अपनी निजी स्वार्थपरता को त्याग करके समाज और देश को सम्पुष्ट बनाये रखना चाहिए। व्यास जी ने एक उदाहरण देकर बहुत बढ़िया संकेत किये कि रात भर बरसात हुई फिर भी घडा खाली का खाली। इसका सीधा सा अर्थ है कि यातो घडा उल्टा है या फिर फूटा हुआ है।कथा में प्रसंगानुसार समसामयिक भजन कीर्तन भी होते रहे तथा गिरिराज पूजन करते हुए भक्तगण उछलते कूदते और उत्सव मनाते रहे। तत्पश्चात रुक्मिणी विवाह का भव्य मंचन साक्षात स्वरूप के माध्यम से हुआ। इतना सुन्दर स्वरूप कि लग रहा था मण्डप के तले आज सचमुच रुक्मिणी जी पधार गई हों। पण्डाल तले पूरा वातावरण मांगलिक बाजे गाजे और पटाखे की ध्वनियों से गूॅजने लगा। महराज जी ने सभी समुपस्थित भक्तों और यजवान परिवार को रुक्मिणी मंगल की शुभकामनाएँ देते हुए श्रीमद्भागवत जी की पारंपरिक विधि से आरती कराकर वाणी को विराम हुआ। बता दें कि कल 25 मार्च को कथा की पूर्णाहुति और हवन पूजन भी सम्पन्न होगा। लेते जाना रे प्रभु का नाम लेते जाना की धुनि के साथ साथ सभी श्रोतागण घरको प्रस्थान किये। कथा में आगन्तुक अतिथियों में से प्रमुख मुख रूप से डाॅ. श्रीनिवास शुक्ल सरस साहित्यकार, अमित सिंह बघेल, संतोष सिंह बंजारी, प्रभाकर सिंह, जगजीवन राम शुक्ल, राजकुमार सिंह चौहान सहित कई गणमान्य जन, अधिकारी कर्मचारी अधिकारी तथा व्यापारियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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