संपूर्ण भारत में वन नेशन वन सिलेबस का नियम लागू किया जावे-डॉ. क्षत्रवीर सिंह

मध्य प्रदेश शिक्षक संघ जिला सीधी के जिलाध्यक्ष सतीश कुमार पाण्डेय ने बताया कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम ) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक का आयोजन 16 -18 मई 2026 को कर्नाटक के धारवाड़ में किया गया । प्रमुख मार्गदर्शन एवं पाथेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख सुनील भाई मेहता पूर्ण समय बैठक में रहकर दिया । संघ के वरिष्ठ प्रचारक अखिल भारतीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर एवं सह संगठन मंत्री लक्ष्मण,वरिष्ठ अभा उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार उच्च शिक्षा का भी विभिन्न सत्रों में प्रबोधन प्राप्त हुआ l अखिल भारतीय बैठक की अध्यक्षता प्रोफेसर नारायण लाल गुप्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष जयपुर ने की l बैठक का संचालन डॉ. गीता भट्ट अभा महामंत्री एवं दिल्ली विश्वविद्यालय की निदेशक ने किया l देशभर से आए शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक में मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर ने शिक्षा एवं शिक्षकों से संबंधित समस्याओं,सेवा संबंधी विसंगतियों तथा शिक्षा सुधारों को लेकर विस्तृत चर्चा करते हुए 12 सूत्रीय मांग पत्र के समाधान हेतु राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि देशभर में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, शिक्षकों को सम्मानजनक सेवा परिस्थितियां देने तथा विद्यार्थियों को समान शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समान नीति बनाई जाना समय की आवश्यकता है। बैठक में मध्यप्रदेश इकाई की ओर से “वन नेशन, वन सिलेबस” की मांग प्रमुखता से उठाई गई। संगठन ने कहा कि पूरे देश में एक समान पाठ्यक्रम लागू होने से शिक्षा की गुणवत्ता में समानता आएगी तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच का अंतर कम होगा। इसी के साथ शिक्षकों के लिए 8वें वेतन आयोग को पूरे देश में एक समान तिथि से लागू करने की मांग भी जोरदार तरीके से उठाई गई। संगठन ने प्रस्ताव रखा कि केंद्रीय वित्त मंत्री सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की संयुक्त बैठक बुलाकर राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ वेतनमान लागू करने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।महामंत्री राकेश गुप्ता ने कहा कि संगठन शिक्षकों के मान-सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए निरंतर संघर्षरत रहेगा।
बैठक में मध्यप्रदेश से अखिल भारतीय कोषाध्यक्ष संजय राउत, प्रांतीय संगठन मंत्री हिम्मत सिंह जैन, प्रांतीय सह संगठन मंत्री राजीव शर्मा तथा हीरालाल तिरोले सहित अन्य पदाधिकारियों ने सहभागिता की।
बैठक में उठीं शिक्षकों की प्रमुख मांगें-
राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में महत्वपूर्ण मांगों और एजेंडा बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संस्कृत विषय को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। ग्रेच्युटी व्यवस्था को वैकल्पिक न रखकर अनिवार्य किया जाए। प्रदेश में नवीन शिक्षक संवर्ग को नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता एवं पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाए । शिक्षकों के जीपीएफ खातों के संचालन हेतु एटीएम कार्ड सुविधा उपलब्ध कराई जाए। आरटीई के अंतर्गत अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया को सरल बनाते हुए लम्बित प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया जाए।
त्रिभाषा सूत्र में हिंदी भाषा को अनिवार्य किया जाए।
8वें वेतन आयोग को पूरे देश में एक समान तिथि से लागू किया जाए। छात्र-शिक्षक अनुपात पूरे देश में एक समान रखा जाए। शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से पूर्णतः मुक्त रखा जाए। केंद्रीय वित्त मंत्री एवं सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की संयुक्त बैठक बुलाकर शिक्षकों के वेतनमान एवं वित्तीय लाभों पर समान नीति बनाई जाए।
बैठक में टीईटी से जुड़े मामलों पर भी गंभीर चर्चा हुई। संगठन की ओर से कहा गया कि यदि टीईटी को लेकर शिक्षकों के हितों के विपरीत कोई निर्णय आता है तो केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर शिक्षकों के हितों की रक्षा करे।
बैठक के दूसरे सत्र में संगठन ने कहा कि विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत व्यावसायिक एवं अतिथि शिक्षकों के मानदेय में लंबे समय से वृद्धि नहीं हुई है, जिसे तत्काल बढ़ाया जाना चाहिए और माह में एक दिन का अवकाश सुरक्षित करते हुए सेवा सुरक्षा भी दी जावे । इसके अलावा यह मांग भी रखी गई कि जिस प्रकार उर्दू एवं मदरसा शिक्षकों को अनुदान दिया जाता है, उसी प्रकार संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों को भी प्रतिमाह 20 हजार की वित्तीय सहायता प्रदान की जाए ताकि सभी भाषाओं एवं शिक्षकों के बीच समानता बनी रहे।



