भारत में पेपर लीक का बढ़ता संकट: 10 वर्षों में करोड़ों युवाओं का भविष्य प्रभावित- अभिषेक मिश्रा

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व जिला संयोजक अभिषेक मिश्रा ने नीट – यूजी 2026 परीक्षा रद्द एवं पेपर लीक मामले पर गंभीर आपत्ति जताते हुए एनटीए की परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने परीक्षा संचालन में लापरवाही का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।अभिषेक मिश्रा ने कहा कि भारत में पिछले एक दशक से भर्ती, प्रवेश एवं बोर्ड परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक ने देश की शिक्षा एवं भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। विभिन्न राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों एवं जांचों के अनुसार वर्ष 2014 से 2026 के बीच देशभर में लगभग 70 से 90 बड़े पेपर लीक मामले सामने आए, जिनसे करीब 1.7 करोड़ से अधिक छात्र एवं अभ्यर्थी प्रभावित हुए।प्रमुख मीडिया रिपोर्टों में बड़ा खुलासा-अभिषेक मिश्रा ने बताया कि इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट के अनुसार केवल 5 वर्षों में 15 राज्यों में 41 बड़े पेपर लीक हुए। इंडिया टुडे के अनुसार पिछले 7 वर्षों में 70 से अधिक पेपर लीक मामलों से लगभग 1.7 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हुए। न्यूज़ लाउंड्री की रिपोर्ट में पिछले 10 वर्षों में 89 पेपर लीक केस एवं 48 री-एग्जाम का उल्लेख किया गया है।प्रमुख परीक्षाएं एवं प्रभावित छात्र -एआईपीएमटी पेपर लीक 2015 — लगभग 6.3 लाख एसएससी सीजीएल विवाद 2017 — लगभग 30 लाखसीबीएसई पेपर लीक 2018 — लगभग 28 लाख रीट भर्ती घोटाला 2021 — लगभग 16 लाख नीट- यूजी विवाद 2024 — लगभग 24 लाख यूजीसी – नेट परीक्षा रद्द 2024 — लगभग 9 लाख यूपी पुलिस कांस्टेबल एग्जाम लीक 2024 — लगभग 48 लाखव्यापम घोटाला — इन सभी मामलों को मिलाकर प्रभावित छात्रों की संख्या 1.7 करोड़ से अधिक मानी जा रही है।छात्रों को भारी आर्थिक नुकसान-अभिषेक मिश्रा ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों एवं उनके परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाला है। यदि प्रति छात्र आवेदन शुल्क,यात्रा एवं आवास,कोचिंग फीस एवं पुनः परीक्षा खर्च यदि केवल 5 हजार से 20 हजार तक का माना जाए, तो कुल आर्थिक नुकसान लगभग 8,500 करोड़ से 34,000 करोड़ तक हो सकता है। ग्रामीण एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह स्थिति और अधिक गंभीर रही।हालिया दर्दनाक घटनाएं -राजस्थान के सीकर में नीट परीक्षा में लगभग 650 अंक आने की उम्मीद कर रहे 22 वर्षीय छात्र ने परीक्षा विवाद के बाद आत्महत्या कर ली।उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में तीसरे प्रयास की तैयारी कर रहे 21 वर्षीय छात्र ने परीक्षा रद्द होने के तनाव में अपनी जान दे दी। दिल्ली में मेडिकल प्रवेश परीक्षा विवाद के बीच 20 वर्षीय छात्रा की आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षा प्रणाली का संकट नहीं बल्कि गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है।सरकार के कदमों पर भी उठे सवाल -अभिषेक मिश्रा ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2024 में पब्लिक एक्जामिनेशन एक्ट , 2024 लागू किया, लेकिन इसके बावजूद पेपर लीक की घटनाएं पूरी तरह नहीं रुक रही हैं अतः केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। जब तक परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी नहीं होगी, तकनीकी सुरक्षा मजबूत नहीं होगी एवं दोषियों को त्वरित सजा नहीं मिलेगी, तब तक इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।निष्कर्ष-अभिषेक मिश्रा ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में पेपर लीक भारत के करोड़ों युवाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। इससे न केवल छात्रों का आर्थिक एवं मानसिक नुकसान हुआ है, बल्कि देश की भर्ती एवं शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता भी प्रभावित हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार एवं एनटीए से निष्पक्ष जांच, सुरक्षित परीक्षा प्रणाली एवं दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि आज देशभर के छात्र केवल एक ही मांग कर रहे हैं —मेहनत का न्याय और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था।



