सिंगरौली

सड़क हादसे में केसीसीएल कर्मी की मौत, आक्रोशित ग्रामीणों ने 12 घंटे किया चक्काजाम

सुबह घर से मोटरसाइकिल लेकर कलिंगा कंपनी अमलोरी में ड्यूटी पर निकले कर्मी की अज्ञात वाहन के टक्कर से खुटार पुलिस चौकी क्षेत्र के बनौली मुख्य मार्ग में मौत हो गई। परिजन कोल वाहन के टक्कर से मौत का कारण बता रहे हैं। गुस्साए मृतक के परिजन एवं ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर 12 घंटे तक जाम कर रखा था। मंगलवार शाम के वक्त एसडीएम, एसडीओपी एवं तहसीलदार, थाना व चौकी प्रभारी के समझाइस के बाद मामला किसी तरह शांत हुआ। इस दौरान कोल वाहनों के परिचालन को लेकर लोगों में काफी आक्रोश है। जानकारी के अनुसार ग्राम कर्सुआ निवासी जवाहिर उर्फ अशर्फीलाल जायसवाल उम्र 40 वर्ष मंगलवार की अलसुबह मोटरसाइकिल लेकर एनसीएल परियोजना अमलोरी स्थित केसीसीएल में ड्यूटी करने निकले थे कि बनौली में किसी अज्ञात वाहन के टक्कर से घायल हो गये, जिसकी खबर मिलते ही खुटार चौकी पुलिस तत्काल घायलों को जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर बैढ़न में लाकर भर्ती कराया, लेकिन कुछ देर बाद चिकित्सको ने मृत घोषित कर दिया। उक्त घटना की जानकारी मिलते ही पहले ट्रामा सेंटर आए और शव को लेकर बनौली पहुंच गये। जहां सुबह 9 बजे शव को सड़क पर रखकर चक्काजाम शुरू कर दिया। इस चक्काजाम से परसौना- रजमिलान मार्ग पूरी तरह से बाधित हो गया। घटना की सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी खुटार शीतला यादव अपने स्टाफ के साथ घटना स्थल पहुंची, इसके बाद कोतवाली टीआई अशोक सिंह परिहार, विंध्यनगर टीआई अर्चना द्विवेदी के साथ-साथ प्रभारी सीएसपी राहुल कुमार सैयाम, तहसीलदार प्रीति सिकरवार समेत अन्य थाना व चौकी प्रभारी पहुंचे। काफी समझाइस के बाद मामले में सुलह हुआ। 1 करोड़ रूपये पर अटकी थी बात-मृतक के परिजनों को लगातार समझाइस देते रहे लेकिन वहां मौजूद कोई भी व्यक्ति प्रशासन एवं पुलिस की बातो को सुनने को तैयार नही थे। वहां एक मांग थी कि कोल वाहन इस मार्ग से बंद किये जाए और मृतक के आश्रितो को 1 करोड़ का मुआवजा, कंपनी में एक लोग की नौकरी और मृतक के बच्चों के पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा उठाए। साथ ही मृतक के आश्रितो को कंपनी के द्वारा भत्ता दिया जाए। इन्ही सब मांगों को लेकर करीब 12 घंटे तक चक्काजाम चला, अंतत: प्रशासन एवं पुलिस के समझाइस के बाद किसी तरह यह मामला शांत हुआ। इस दौरान मृतक के आश्रित को दो लाख रूपये के साथ-साथ बीमा क्लेम एवं कंपनी के रहने तक भत्ता देने का आश्वासन दिया गया, तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ। बूझ गया घर कर चिराग, बच्चों के पालन-पोषण की चिंता-दरअसल अशर्फीलाल जायसवाल घर के इकलौते चिराग थे। दो साल पहले इनके छोटे भाई की एक हादसे में मौत हो गई थी। छोटे भाई के तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। इन बच्चों की देखभाल अशर्फीलाल ही करते थे और अशर्फीलाल के तीन बच्चे भी हैं, जो अभी नाबालिक हैं। मृतक की मॉ एवं पत्नी घटनास्थल पर शव से लिपट कर यही रो रहे थे कि अब बच्चो की परवरिश कौन करेगा। इसकी चिंता मृतक के नात-रिश्तेदारों को भी सताने लगी। घटनास्थल पर मौजूद प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों में भी मानवता दिखी। इस मार्मिक दृश्य को देखकर उनके भी ऑखों में आसू आ गये। प्रशासन ने माना की छोटे-छोटे बच्चों के परवरिश, पठन-पाठन के लिए कहीं न कहीं से व्यवस्था करानी पड़ेगी। हालांकि पूरे दिन प्रशासन एवं पुलिस अधिकारी इसी बात पर लगे थे कि मृतक के परिजनों को अधिक से अधिक सहायता मिल सके।

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