सिंगरौली

रिहंद जलाशय में हजारों मछलियों की मौत से पर्यावरणीय संकट गहराया

सिंगरौली जिला कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग जिला सिंगरौली के संगठन मंत्री अधिवक्ता उसैद हसन सिद्दीकी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सीमा पर स्थित रिहंद जलाशय में हजारों मछलियों की हुई मौत को गंभीर पर्यावरणीय संकट बताया है जिसे कांग्रेस पार्टी कभी-कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक प्रदूषण और जल गुणवत्ता को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।श्री सिद्दीकी ने बताया कि रिहंद जलाशय के किनारों पर बड़ी संख्या में मृत मछलियां मिलने के बाद स्थानीय लोगों में भय, आक्रोश और चिंता का माहौल बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनटीपीसी संयंत्रों से निकलने वाला उपयोग किया गया पानी लगातार डेम में छोड़ा जा रहा है, जिससे जल प्रदूषण बढ़ रहा है और इसका दुष्प्रभाव जलीय जीवों के साथ-साथ मानव जीवन पर भी पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि रिहंद जलाशय का पानी सिंगरौली नगर निगम क्षेत्र सहित एनटीपीसी, एनसीएल एवं अन्य औद्योगिक टाउनशिप में रहने वाले हजारों लोगों के उपयोग में आता है। ऐसे में मछलियों की सामूहिक मौत ने पानी की शुद्धता और आम नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है।अधिवक्ता उसैद हसन सिद्दीकी ने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है जब रिहंद जलाशय प्रदूषण को लेकर चर्चा में आया हो। इससे पूर्व भी एनटीपीसी के फ्लाई ऐश डैम टूटने के बाद भारी मात्रा में राख जलाशय के पानी में मिलने का मामला सामने आया था, जिससे पर्यावरणीय क्षति और जल प्रदूषण को लेकर व्यापक सवाल उठे थे।उन्होंने यह भी कहा कि अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर हजारों मछलियों की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या है। यदि जल प्रदूषण इसके लिए जिम्मेदार है तो दोषियों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है। श्री सिद्दीकी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जलाशय के पानी की गुणवत्ता की तत्काल जांच कराने की मांग जिला प्रशासन से की है।उन्होंने जिला प्रशासन से मांग किया है कि जल प्रदूषण रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और आमजन के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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