सीधी

ग्राम पूर्वा एवं रजहा के बाद ग्राम कारी में भी kyc के नाम पर लूट का खुलासा

सीधी-ज्ञात हो आरोपी रीतेश मिश्रा पिता ओमप्रकाश मिश्रा तथा रामकुमार मिश्रा पिता श्यामसुंदर मिश्रा निवासी ग्राम पोस्ट पहाड़ी थाना अमिलिया जिला सीधी द्वारा आए दिनों लगातार आवास kyc के नाम पर आदिवासियो से बिना किसी खौफ के लूट की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। बीते दिनों ग्राम पूर्वा के आदिवासीयो द्वारा जियामन थाना में शिकायत दर्ज कराई गई थी लेकिन आज तक प्रशासन द्वारा न FIR दर्ज की गई न ही कोई भी कार्यवाही नही की गई। तथा बहरी थाना अंतर्गत ग्राम रजहा के आदिवासी मजदूरो एवं महिलाओं के साथ भी आवास kyc के नाम पर लाडली बहना योजना एवं आदिवासी मजदूरो की जमा पूजी का पैसा लूटा गया था। सीधी पुलिस अधीक्षक महोदय से न्याय की गुहार लगाने के बाद पुलिस अधीक्षक द्वारा तत्काल मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही का आश्वासन दिया गया था। लेकिन बहरी पुलिस द्वारा FIR तो दर्ज की गई लेकिन खाना पूर्ति करते हुए एक धारा 318(4) लगाई गई एवं एक आरोपी पकडा गया और तत्काल जमानत भी दे दी गई जबकि आरोपियो पर 318(2) एवं 61(2) की धारा भी दर्ज की जानी चाहिए थी एवं न्यायालय मे पेश किया जाना चाहिए था। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं किया जाना पुलिस प्रशासन पर सवालिया निशान खड़े करता है।

ज्ञात हो इन्हीं दो आरोपियों द्वारा ग्राम कारी थाना जियामन मे पुनः लूट की घटना सामने आई है। 

ग्राम कारी में लगभग दर्जन भर आदिवासियो व अन्य ग्रामीणों के साथ भी kyc के नाम पर लूट करने का मामला सामने आया जिसकी FIR जियामन थाना में  पीड़ित पक्ष द्वारा दर्ज कराई गई है। अब देखना दिलचस्व होगा की दो वर्षों से हो रहे लूट की घटना में प्रशासनिक कार्यवाही  कहा तक होती है। आदिवासी, मजदूर, किसान एवं महिलाओं के साथ हुए धोखाधड़ी का न्याय मिल पाता है या प्रशासनिक साठ गांठ से आरोपीयो को पुलिस बहरी थाना की तरह कागजो पर खानापूर्ती कर छोड दिया जाता हैं। ताकि आरोपी बेखौफ होकर घटना को अंजाम देते रहें। हालांकि जियामन थाना में ग्राम कारी मे हुई इस घटना की FIR दर्ज कर ली गई है। लेकिन जियामन पुलिस द्वारा ग्राम पुर्वा की घटना पर आज तक FIR दर्ज नहीं की गई है जो समझ से परे है।

पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने का भरोसा भी जताया गया है लेकिन सवाल ये उठता है कि ऐसी घटनाए कब तक होती रहेगी क्या प्रशासन के सह से लूट को अंजाम दिया जा रहा है, मामला जांच तक सीमित कर देने से आरोपियों का मनोबल और तीव्र गति से बढ़ रहा हैं। क्या इन घटनाओ पर पूर्ण विराम लग पाएगा, क्यूकि लगातार घटना को अंजाम देकर आरोपी बेखौफ घूम रहे है जिसके कारण पुलिस प्रशासन पर सवालिया निशान खड़े होते है।

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