सीधी

नई रेल लाइन में मुआवजा लेने भूमि की रजिस्ट्री कराने की मची होड़

सीधी जिले में ब्यौहारी-मझौली नवीन रेल लाइन को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। रेलवे में भू-अधिग्रहण के चलते दर्जन भर गांवों की जमीनों के रेट आसमान पर पहुंच गए हैं। रेलवे में अधिग्रहित होने वाली भूमियों का मुआवजा चार गुना पाने के लिए लोग रजिस्ट्री कराने की होड़ में शामिल हो गए हैं। स्थिति यह है कि इन दिनों रजिस्टार कार्यालय में दलालों का बोलबाला मचा हुआ है। दलालों द्वारा नए-नए लोगों को संबंधित गांवों की भूमि की रजिस्ट्री कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी गई है। रजिस्टार कार्यालय से जुड़े दलालों के हांथों में इन दिनों रेलवे लाइन में आने वाली भूमियों की पूरी सूची रकवा नंबर समेत मौजूद है। दलालों के माध्यम से ही भूमि स्वामी एवं क्रेता का संपर्क हो रहा है और रजिस्ट्री कराने का क्रम भी अनवरत रूप से चल रहा है। जानकारों का कहना है कि रेलवे में अधिग्रहित होने वाली भूमि की रजिस्ट्री कराने के लिए सीधी जिले के साथ ही सिंगरौली, मऊगंज, रीवा, शहडोल और सतना जिले के लोग भी बड़ी संख्या में रोजाना पहुंच रहे हैं। खरीददारों की संख्या लगातार बढऩे के कारण दलालों की चांदी कट रही है। संबंधित गांवों की भूमि जहां एकड़ में भी कोई खरीदने को तैयार नहीं था आज छोटे-छोटे प्लाट में बिक्री शुरू हो गई है। छोटे प्लाट की कीमत भी लाखों रुपए में है। छोटे प्लाट भी डेढ़-दो लाख रुपए में बेंचने का काम किया जा रहा है। खरीददारों की संख्या बढऩे के कारण संबंधित गांवों के किसान भी इन दिनों करोडपति होने लगे हैं। दरअसल कुछ लोगों की नजर रेलवे एवं राष्ट्रीय राजमार्ग के मुआवजे पर हमेंशा से रहती है। ऐसे लोग लाखों रुपए जमीन खरीदने में लगाते हैं और बाद में चार गुना ज्यादा कीमत का मुआवजा कुछ समय के अंदर ही हांसिल कर लेते हैं। इसी वजह से ऐसे लोगों को जैसे ही रेलवे एवं राष्ट्रीय राजमार्ग में अधिग्रहित होने वाली भूमियों के संबंध में जानकारी लगती है वह खरीद फरोख्त शुरू कर देते हैं।

नवीन रेलवे लाइन निकलने पर भी बना संशय –

सिंगरौली-ब्यौहारी पुरानी रेलवे लाइन संजय टाईगर रिजर्व क्षेत्र के बड़े हिस्से से गुजरती है। टाइगर रिजर्व क्षेत्र के वन्यजीव रेल की चपेट में आकर घायल हो जाते हैं या फिर अपनी जान गवां बैठते हैं। इसी वजह से संजय टाइगर रिजर्व की ओर से यह मांग की गई थीे कि रेलवे लाइन को वन्य क्षेत्र के बाहर से ले जाया जाए। रेलवे विभाग द्वारा इसी के चलते ब्यौहारी से मझौली के लिए नवीन रेलवे लाइन की कार्ययोजना करीब तीन वर्ष पहले बनाई गई थी। यह कार्ययोजना अमल में आएगी या नहीं इसको लेकर भी अभी रेलवे विभाग द्वारा अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। फिर भी इस संबंध में चर्चाओं का बाजार हाल ही में काफी गरम हुआ है और लोग आनन-फानन में भूमि की रजिस्ट्री कराने की होड़ मचाए हुए हैं।

रेलवे में अधिग्रहित होने वाले संभावित गांव –

ब्यौहारी-मझौली नवीन रेलवे लाइन में सीधी जिले के मझौली ब्लॉक के संभावित गांवों की भूमि अधिग्रहित हो सकती है। संभावित गांवों में चमराडोल, बोदारी टोला, सेमरिहा, दढ़ौर, पांड, धनौली, नेबूहा, नगर परिषद मझौली वार्ड क्रमांक 9, टेकर, जमुआ नंबर 2, सरैहा, ठोंगा, देवरी, जोबा शामिल हैं। ब्यौहारी के संभावित गांवों में बोड्डिहा, पथगड़ी, खरपा, पाखी, मुदरिया आदि शामिल हैं। जानकारों का कहना है कि उक्त गांवों की रेलवे में अधिग्रहित होने वाली भूमियों को लेकर सबसे ज्यादा सौदेबाजी हो रही है। यह अवश्य है कि जिन भूमियों की रजिस्ट्री दलालों के माध्यम से कराई जा रही है वह रेलवे में अधिग्रहित होंगी या नहीं इसको लेकर फिलहाल संशय की स्थिति निर्मित है। फिर भी चार गुना मुआवजा की लालच और दलालों के झांसे में आकर लोग आनन-फानन में ही बिना पुष्ट जानकारी के ही भूमि की रजिस्ट्री करा रहे हैं। महंगे दामों में भूमि बेंचने के लिए उक्त क्षेत्रों के भूमिस्वामी भी सही जानकारी देने की बजाय अफवाह को तूल दे रहे हैं। जिससे उनको छोटी भूमि की कीमत भी लाखों में मिल सके।

रेलवे लाइन के लिए हो चुके है दो सर्वे –

ब्यौहारी-मझौली नवीन रेलवे लाइन के लिए रेलवे विभाग द्वारा दो सर्वे किए गए हैं। पहला सर्वे ब्यौहारी-मझौली मुख्य सडक़ से 200 मीटर की दूरी से किया गया है। वहीं दूसरा सर्वे बाद में ब्यौहारी-मझौली मुख्य सडक़ से करीब 1 किलोमीटर दूरी से किया गया है। दो सर्वे होने के कारण अभी तक स्थिति यह स्पष्ट नहीं हो सकी है कि रेलवे लाइन के निर्माण के लिए किस सर्वे पर मोहर लगेगी। फिर भी दलालों द्वारा दोनो सर्वे को आधार बनाकर भूमि की बिक्री कराने के लिए भूमि की रजिस्ट्री कराने का खेल बड़े पैमाने पर शुरू किया गया है। चार गुना मुआवजा की लालच में लोग यह जानने का प्रयास नहीं कर रहे हैं कि जिस गांव की भूमि की रजिस्ट्री वह करा रहे हैं वहां से रेलवे लाइन निकलेगी या नहीं। संंबंधित गांवों की भूमि निर्धारित से 50 गुना ज्यादा कीमत में बेंचने का जो खेल शुरू किया गया है वह फिलहाल रुकता हुआ नजर नहीं आ रहा है।

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