सरई में श्रीमद्भागवत कथा का विश्राम दिवस, सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष प्रसंग ने भक्तों को किया भावविभोर


सिंगरौली जिले के नगर परिषद सरई अंतर्गत थाना रोड स्थित वार्ड क्रमांक 4 में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ का सातवां एवं विश्राम दिवस रविवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र, राजा परीक्षित मोक्ष तथा भावपूर्ण विदाई प्रसंग का ऐसा मार्मिक वर्णन किया गया कि पांडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की निष्कलुष मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि सच्चे संबंधों में धन-दौलत का कोई स्थान नहीं होता। सुदामा की निर्धनता के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बालसखा का जिस प्रेम, विनम्रता और आत्मीयता से स्वागत किया, वह प्रसंग श्रद्धालुओं की आंखें नम कर गया। भगवान द्वारा सुदामा के चरण पखारने की कथा ने यह संदेश दिया कि प्रेम और भक्ति के समक्ष सांसारिक वैभव का कोई महत्व नहीं है। इसके पश्चात शुकदेव जी द्वारा राजा परीक्षित को सुनाई गई मोक्षकथा का वर्णन किया गया, जिसमें जीवन की नश्वरता और मृत्यु के सत्य को सहज रूप में समझाया गया। इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, वैराग्य और ईश्वर भक्ति की प्रेरणा दी। सप्ताहभर चला यह धार्मिक आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना का माध्यम बना, बल्कि समाज को धर्म और संस्कारों से जोड़ने का भी कार्य करता रहा। आयोजन की मुख्य संयोजक एडवोकेट गोमती जायसवाल एवं एडवोकेट जावित्री जायसवाल रहीं। सोमवार को हवन-पूजन एवं भंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन किया जाएगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।



