सिंगरौली

भर्रा में बारह वर्षो से अधर में स्कूल भवन, एनएच-39 विस्तार में तोड़े गए थे कमरे

सीधी-सिंगरौली नेशनल हाईवे-39 के विस्तार कार्य के दौरान की गई लापरवाही का खामियाजा आज भी मासूम बच्चे भुगत रहे हैं। मामला शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय भर्रा का है, जहां करीब 12 वर्षों पूर्व सड़क चौड़ीकरण के दौरान विद्यालय के तीन कमरे, एक बरामदा और बाउंड्री वॉल को तोड़ दिया गया था। उस समय निर्माण एजेंसी द्वारा आश्वासन दिया गया था कि शीघ्र ही नए भवन और बाउंड्री का निर्माण करा दिया जाएगा, लेकिन आज तक यह वादा केवल कागजों में ही सिमटकर रह गया है। बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण कार्य के दौरान गैमन इंडिया की सहयोगी संविदा कंपनी टेक्नो यूनिक ने स्कूल भवन के हिस्से को ध्वस्त किया था। नियमानुसार उक्त भवन और बाउंड्री वॉल का पुनर्निर्माण एमपीआरडीसी को कराना था, लेकिन 12 साल बीत जाने के बाद भी न तो भवन बना और न ही बाउंड्री वॉल का निर्माण हुआ। वर्तमान स्थिति यह है कि कक्षा 1 से 8वीं तक के करीब दो सैकड़ा छात्र-छात्राएं महज तीन कमरों और एक बरामदे में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। एक ही जगह पर अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को बैठाना शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा प्रहार है। यह हाल केवल असुविधा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है। वहीं बाउंड्री वॉल न होने से विद्यालय परिसर पूरी तरह असुरक्षित हो चुका है। रात के समय यहां मवेशियों का जमावड़ा लग जाता है, जिससे परिसर गंदगी से भर जाता है। सुबह जब बच्चे स्कूल पहुंचते हैं, तो उन्हें पढ़ाई से पहले गंदगी का सामना करना पड़ता है। यह दृश्य न केवल शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है, बल्कि जिम्मेदारों की संवेदनहीनता को भी उजागर करता है।दो ठेकेदार बदले, तीसरे की बारी, नही बना भवनगौरतलब है कि एनएच-39 के निर्माण में अब तक दो ठेकेदार बदल चुके हैं और तीसरे ठेकेदार का सड़क का काम भी अभी तक अधूरा है। हर बार नए वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। सवाल उठता है कि जब सड़क का काम पूरा नहीं हो पाया, तो क्या स्कूल भवन का निर्माण प्राथमिकता में नहीं था। इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा कई बार पत्राचार किया गया। ग्राम पंचायत कठुआ के सरपंच ने भी कई बार प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। पंचायत का कहना है कि उनके पास इतने बड़े निर्माण कार्य के लिए बजट नहीं है और यह जिम्मेदारी एमपीआरडीसी की है, लेकिन संबंधित एजेंसी द्वारा कोई पहल नहीं की जा रही है। पूरे मामले में शासन और प्रशासन की उदासीनता साफ नजर आ रही है। भर्रा गांव निवासी कई ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन पर सीधा आरोप लगाया है और कहा है कि इस गंभीर मसले में किसी का भी ध्यान नही है। जबकि इसके बारे में सांसद, विधायक एवं मंत्री तक वाकिफ हैं। इसके बावजूद राशि उपलब्ध कराने के लिए सार्थक प्रयास नही किया। प्रभारी मंत्री के बारे में कहा कि उनसे कोई लेना-देना नही है। सिंगरौली में उनका दौरा किन कारणों से होता है, वह जग जाहिर है। वहीं यह भी कहना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भी जिम्मेदार विभागों की चुप्पी यह दर्शाती है कि बच्चों के भविष्य की किसी को चिंता नहीं है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस गंभीर समस्या पर ध्यान देगा या फिर इसी तरह आंखें मूंदे बैठा रहेगा। आखिर कब तक मासूम बच्चे बदहाल व्यवस्था में पढ़ाई करने को मजबूर रहेंगे। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि तत्काल हस्तक्षेप की मांग भी करती है।इनका कहना:-स्कूल भवन निर्माण के लिए लगातार कई बार पत्राचार किया गया, यहां तक कि भोपाल भी पत्र दिया गया। जिला अधिकारियों को भी अवगत कराया गया, परंतु राशि आवंटन नही हुआ। जिसके चलते छात्रों एवं शिक्षको को परेशानी उठानी पड़ रही है। आशीष कुमार गुप्तासरपंच, ग्राम पंचायत करथुआ

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