जल गंगा संवर्धन अभियान में ग्राम पंचायतों की सक्रिय भूमिका

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिले की ग्राम पंचायतें जल संरक्षण एवं स्वच्छता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में ग्रे वाटर प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए लीच पिट की मरम्मत एवं रंगाई-पुताई का कार्य कराया जा रहा है, जिससे अपशिष्ट जल के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था सुदृढ़ हो रही है। ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में घरों से निकलने वाले अपशिष्ट जल (ग्रे वाटर) के प्रबंधन हेतु लीच पिट एक किफायती, पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ प्रणाली के रूप में उपयोगी सिद्ध हो रही है। यह व्यवस्था पानी को धीरे-धीरे जमीन में रिसने देती है, जिससे जलभराव की समस्या नहीं होती और भूजल स्तर के पुनर्भरण में भी मदद मिलती है। अभियान के तहत सभी ग्राम पंचायतों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर जनसमुदाय एवं शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों को जल संरक्षण, स्वच्छता एवं जल के सदुपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस दौरान सामूहिक रूप से जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई जा रही है। इसके साथ ही अभियान के अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर ‘जल मंदिर’ स्थापित कर पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। वहीं पारंपरिक ‘प्याऊ’ की व्यवस्था के माध्यम से जरूरतमंदों को निःशुल्क ठंडा पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। यह परंपरा न केवल प्यास बुझाने का कार्य करती है, बल्कि सामाजिक सद्भाव, मानवीय संवेदना और जल संरक्षण के संदेश को भी सशक्त रूप से प्रसारित करती है।जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से जिले में जल संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयासों को नई गति मिल रही है।



