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उमस भरी गर्मी के चलते बढ़ा बीमारियों का प्रकोप

सीधी: जिले में अवर्षा के बने हालात के चलते उमस भरी गर्मी का भारी प्रकोप बना हुआ है। उमस भरी गर्मी ने लोगों को पूरी तरह से बेहाल कर रखा है। उमस भरी गर्मी से राहत पाने के लिए लोग कूलर का उपयोग भी करने को मजबूर हैं। वर्तमान में ऐसे हालात बने हुए हैं कि यदि थोड़ी सी भी लापरवाही हुई तो सर्द गरम की चपेट में लोग आसानी से आ जाते हैं। इसी के चलते काफी संख्या में लोग वायरल फीवर की चपेट में आकर डॉक्टरों के पास इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। वर्तमान में सबसे ज्यादा वायरल फीवर एवं पेट की बीमारियों से पीडि़त होकर लोग उपचार कराने के लिए डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं।

चर्चा के दौरान कुछ डॉक्टरों ने बताया कि वर्तमान में इस तरह का मौसम बना हुआ है कि थोड़ी सी लापरवाही भी लोगों को भारी पड़ सकती है। सर्दी एवं गर्मी का असर भी बना हुआ है। जिसके चलते लोग वायरल फीवर की चपेट में आ रहे हैं। खान-पान को लेकर भी इन दिनों काफी सावधान रहने की जरूरत है। बासी एवं प्रदूषित खाद्य सामग्री का उपयोग करना काफी भारी पड़ सकता है। वर्तमान में बने वातावरण के चलते लोगों को कम मात्रा में भोजन करना चाहिए तथा ताजा भोजन ही उपयोग में लेना चाहिए। बचा हुआ भोजन कुछ घंटे के अंदर ही प्रदूषित हो जाता है और उसका उपयोग करने में फूड प्वाइजनिंग की समस्या बढ़ जाती है। इस तरह की सावधानी बरतने की अपील स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार लोगों से की जा रही है कि वर्तमान में प्रदूषित एवं बासी भोजन का उपयोग कतई न करें। देखा यह जा रहा है कि पेट की बीमारियों से संबंधित जो भी मरीज आ रहे हैं उनमें फूड प्वाइजनिंग के लक्षण ज्यादा पाए जा रहे हैं। फूड प्वाइजनिंग के चलते उल्टी दस्त के मरीजों की संख्या भी सीधी जिले में बढ़ रही है। इस तरह के मरीज शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र से समान रूप से आ रहे हैं। पेट संबंधित तकलीफ होने पर लोगों को जल्द से जल्द अच्छे चिकित्सक के पास जाकर उपचार सुनिश्चित कराना चाहिए। यदि उपचार में ज्यादा बिलम्ब हुआ तो यह जानलेवा भी सावित हो सकता है। इसी वजह से मरीजों को तकलीफ होने पर तत्काल उपचार कराए। उधर मौसमी बीमारियों का कहर बरपने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित उप स्वास्थ्य केन्द्रों का संचालन मनमानी तौर पर किया जा रहा है। उप स्वास्थ्य केन्द्रों का प्रभार ऐसे कर्मचारियों को मिला हुआ है जो कि स्थानीय निवासी हैं। इस वजह से यह कर्मचारी समय पर न तो उप स्वास्थ्य केन्द्र को खोलते हैं और न ही मरीजों को प्राथमिक उपचार सुविधा उपलब्ध कराते हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों का हाल भी ज्यादा अच्छा नहीं है। सीधी जिले में कई ऐसे प्राथमिक केन्द्र संचालित हो रहे हैं जिनमें डॉक्टर नहीं मिलते। यह अवश्य है कि ग्रामीण मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में प्राथमिक उपचार सुविधाएं मुहैया हो रही हैं, इसी वजह से इन दिनों सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में मरीजों की भीड़ बनी हुई है। इसके अलावा जिला अस्पताल सीधी में भी मौसमी बीमारियों की चपेट में आने वाले मरीजों की भीड़ करीब एक पखवाड़े से बनी हुई है। मरीजों की संख्या घटने की वजाय लगातार बढ़ रही है। ऐसे में लोगों को बदलते मौसम के बीच अपने खान-पान को लेकर पूरी तरह से सजग रहने की जरूरत है जिससे बीमारियों की चपेट में आने से बचा जा सके। साथ ही सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को भी बेहतर बनाने की जरूरत है।

झोलाछाप डॉक्टरों की कट रही चांदी

मौसमी बीमारियों का प्रकोप बरपने से झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी सबसे ज्यादा कट रही है। झोलाछाप डॉक्टरों के यहां मरीजों की भीड़ सुबह से लेकर देर शाम तक उमड़ रही है। यह अवश्य है कि अधिकांश झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का उपचार करने के साथ ही उनसे ज्यादा से ज्यादा वसूली कर रहे हैं। उनके द्वारा वायरल फीवर से पीडित मरीजों की जांच के नाम पर ही हजारों रूपए ऐंठे जा रहे हैं। इसके अलावा वाटल एवं इंजेक्शन लगाने पर भी उनका बिल एक हजार रूपए से ज्यादा का बन जाता है। कुल मिलाकर वर्तमान में मरीजों की संख्या काफी ज्यादा बढऩे से झोलाछाप डॉक्टरों की दुकान मरीजों की भीड़ से पूरी तरह से गुलजार है। झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा मरीजो को अपने यहां भर्ती करने की व्यवस्था भी बनाई गई है जिससे कुछ घंटे भर्ती करके इंजेक्शन एवं वाटल लगाने के बाद लम्बा चौड़ा बिल वसूला जा सके। झोलाछाप डॉक्टरों के गलत उपचार के चलते कुछ मरीजों की हालत सुधरने के वजाय और भी ज्यादा बिगड़ जाती है। जिसके बाद वह अपना उपचार कराने के लिए अन्य स्थानों में भटकने के लिए मजबूर हो जाते हैं। जिला अस्पताल में गंभीर हालत में आने वाले अधिकांश मरीज आरंभ में अपना उपचार स्थानीय झोलाछाप डॉक्टरों से ही कराए हुए मिल रहे हैं। ऐसे मरीजों को जिला अस्पताल में भी ठीक होने में काफी समय लगता है। जिसके चलते उनके परिजन भी परेशान होते हैं।

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