सीधी

बेमौसम बारिश से छोटे किसानों के समक्ष संकट गहराया-धान की फसल के क्षति का सर्वे करने नहीं पहुंची टीम – छोटे किसानों की रबी सीजन की खेती भी प्रभावित

बेमौसम बारिश से धान की खेती करने वाले छोटे किसानों को भारी क्षति उठानी पड़ी है। विडंबना यह है कि फसल की भारी तबाही होने के बाद भी अभी तक सीधी जिले में सर्वे का काम शुरू नहीं हुआ है। लिहाजा प्रभावित किसानों में भारी मायूसी छाई हुई है। जानकारों के अनुसार सीधी जिले के ऐसे छोटे किसान जिनके द्वारा एक-दो एकड़ भूमि में ही धान की फसल की बोनी की गई थी। ऐसे छोटे किसानों की मेहनत पर पूरी तरह से पानी फिर चुका है। बेमौसम बारिश का दौर सीधी जिले में पांच दिनों तक रहा। जिसके चलते खेतों में खड़ी धान की फसलें नीचे गिरकर पानी में डूब गई। ऐसी फसलें पानी में डूबने के कारण अंकुरित भी होना शुरू हो गई। किसानों में बेमौसम बारिश के चलते हाहाकार मच गया। यह किसान चाह कर भी अपनी पकी धान की फसलों को सुरक्षित नहीं कर सके। वहीं काफी संख्या में ऐसे भी किसान थे जिनके द्वारा धान की पकी फसलों की कटाई का काम कराया जा रहा था। बेमौसम बारिश शुरू हो जाने के बाद वह कटी हुई धान की फसल को भी सुरक्षित नहीं कर सके। खेतों में भी कटी हुई धान की फसलें भीगती रही। कुछ किसानों की कटी हुई धान की फसल गहाई के लिए खलिहान में रखी थी। यह फसल भी पानी में भीगने से बर्बाद हो गई। कुछ किसानों ने चर्चा के दौरान बताया कि जो धान की फसलें खलिहान में रखी हुई थी वह लगातार बारिश के चलते खराब हो गई। उनमें फफूंद लग जाने से वह उपयोग के लायक ही नहीं रह गई। किसानों को उम्मीद थी कि बेमौसम बारिश के कारण प्रशासन की ओर से धान की फसलों को हुई भारी क्षति का सर्वे का काम जल्द शुरू होगा। देखा यह जा रहा है कि प्रशासन द्वारा क्षतिग्रस्त धान की फसलों का सर्वे कराने के लिए कोई फरमान जारी नहीं किया गया। कई छोटे किसानों द्वारा धान की खेती करने के लिए कर्ज भी लिया गया था। जिससे बीज एवं खाद की व्यवस्था हो सके। बेमौसम बारिश ने ऐसे किसानों की उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया। धान की फसल बर्बाद हो जाने के कारण ऐसे किसान रबी फसल की खेती कैसे करेंगे इसको लेकर भी पूरी तरह से अनिश्चितता बन गई है। उधर प्रशासनिक स्तर से अभी तक सर्वे का काम शुरू न कराए जाने से बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों में काफी मायूसी छाई हुई है। दो दिनों से मौसम के खुलने के बाद से भीगी हुई धान की फसलों को किसान सु्रखाने में जुटे हुए हैं। जिससे गहाई का काम शुरू हो सके। किसानों का कहना है कि भीगने के बाद से धान की फसल से जो चावल निकलेगा उसकी गुणवत्ता काफी खराब रहेगी। इस तरह अब आगे धान की फसल के बिकने की उम्मीदें भी धूमिल हो चुकी हैं। बेमौसम बारिश के बाद किसान रबी सीजन की खेती-किसानी करने को लेकर भी अनिश्चितता में फंसे हुए हैं।

किसानों की मेहनत और आशाओं पर फिरा पानी –

बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत और आशाओं पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है। इस वर्ष समय-समय पर बारिश होने के कारण धान की फसल सबसे अच्छी थी। किसानों को उम्मीदें थी कि धान की फसल से भरपूर पैदावार मिलेगी। जिससे वह कुछ अपने आवश्यक कामों को भी कर लेंगे। बेमौसम बारिश की आई प्रकृतिक आपदा ने किसानों की सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कई दिनों तक बारिश होने के कारण खेतों में पानी फिर गया और धान की पकी हुई फसलों के दाने काले पडऩे के साथ अंकुरित भी होना शुरू हो गए। जो धान की कटी हुई फसलें गहाई के लिए खलिहान में रखी हुई थी वह भी लगातार बारिश का दौर चलने से अंकुरित होना शुरू हो गई थी। सीधी जिले के ग्रामीण अंचलों में बेमौसम बारिश के चलते खेत और खलिहानों में तबाही के मंजर नजर आ रहे हैं। चर्चा के दौरान समीपी गांवों के कुछ किसानों का कहना था कि धान की फसल को भारी नुकसान होने के बाद भी अभी तक राजस्व विभाग की ओर से सर्वे का काम शुरू करने की जरूरत नहीं समझी गई है। धान की फसल के बर्बाद होने से सबसे ज्यादा मातम छोटे किसानों में ही देखा जा रहा है। उनको उम्मीद है कि प्रशासन की ओर से धान के फसल की नुकसानी के लिए जल्द से जल्द सर्वे होने और समय पर उचित मुआवजा देने से किसानों को रबी सीजन में खेती करने में मदद मिलेगी। छोटे किसानों द्वारा धान की फसल हेतु खाद, बीज और अन्य संसाधनों के लिए कर्ज लिया गया था। उन्हें आशा थी कि धान की अच्छी उपज मिलने के बाद लिए गए कर्ज को चुका देंगे।

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