सुई-धागे से बदली जिंदगी – चंपा नामदेव आज हैं आत्मनिर्भरता की पहचान

सीधी जिले के मझौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम खडौरा की निवासी चंपा नामदेव आज आत्मनिर्भर महिला उद्यमी के रूप में मिसाल बन चुकी हैं। लगभग पचास किलोमीटर दूर स्थित इस ग्रामीण क्षेत्र की चंपा ने अपने परिश्रम, लगन और आत्मविश्वास से जीवन की दिशा बदल दी है।चंपा नामदेव ने सिलाई एवं रेडीमेड कपड़ों के व्यवसाय को अपना आजीविका का माध्यम बनाया। उन्होंने वंदना स्व-सहायता समूह से जुड़कर सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) योजना के माध्यम से अस्सी हजार रुपये का बैंक ऋण प्राप्त किया। इसी राशि से उन्होंने सिलाई और कपड़ों का व्यापार प्रारंभ किया।शुरुआत भले ही सीमित संसाधनों से हुई, लेकिन अपने कौशल, मेहनत और निरंतरता से चंपा ने व्यवसाय का विस्तार किया। आज वे स्वयं की दुकान संचालित कर रही हैं तथा आसपास की चार से पाँच महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण भी दे रही हैं। उनके द्वारा तैयार किए गए कपड़े अब सिलचर तक भेजे जा रहे हैं। चंपा नामदेव के परिश्रम का परिणाम यह है कि आज उनका परिवार पक्के घर में रह रहा है, बच्चे निजी विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं, और वे प्रति माह लगभग बारह से चौदह हजार रुपये की नियमित आय अर्जित कर रही हैं। चंपा कहती हैं कि यदि सही मार्गदर्शन और सहयोग मिले तो गांव की महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने मुझे समूह से जोड़कर आगे बढ़ने का अवसर दिया, जिसके लिए मैं मिशन की आभारी हूं।



