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आशीष को डॉ.नामवर सिंह सम्मान, बधाई

साहित्य जगत का गौरवपूर्ण डॉ. नामवर सिंह सम्मान -2026 हमारे समय के सर्वाधिक सचेत युवा आलोचक आशीष त्रिपाठी को प्रदान किया गया। उन्हें यह सम्मान विप्लवी पुस्तकालय समिति गोदरगावां द्वारा आयोजित कार्यक्रम में देश के अनेक शीर्ष लेखकों ,साहित्यकारों, कवियों की मौजूदगी में समिति के संरक्षक राजेंद्र राजन द्वारा यह सम्मान प्रदान किया गया। इसके पहले यह सम्मान डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी, नरेश सक्सेना, अवधेश प्रधान, शंभू नाथ, पुरुषोत्तम अग्रवाल, बृज कुमार पांडे,डॉ. पुरुषोत्तम अग्रवाल को दिया जा चुका है। डॉ.नामवर सिंह के बाद हिंदी आलोचना का स्थगन काल चल रहा था। आलोचक के रूप में किसी का नाम ले पाना धर्मसंकट जैसे था। क्योंकि आलोचना का निर्वाह कठिन और दुष्कर है। ऐसे समय में युवा आलोचक आशीष त्रिपाठी ने आगे आकर हिंदी आलोचना जैसे दुरुह कार्य को आगे बढ़ाया। स्वभाव से कवि आशीष हांसिए पर पड़ी आलोचना को धार देने में अपनी विशिष्ट भूमिका निभा रहे हैं। मध्य प्रदेश के सतना जिले के एक गांव में जन्मे आशीष की शिक्षा रीवा तथा जबलपुर में पूरी हुई। उन्होंने प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर के साथ भी काम किया। उनकी पहली पुस्तक “समकालीन हिंदी रंगमंच और रंग भाषा” नाटक पर ही आधारित थी। इन्हें साहित्यिक प्रेरणा घर से ही विरासत में मिली। आशीष मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष डॉ सेवाराम त्रिपाठी के चिरंजीवी हैं। आशीष ने गहरे मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं को जिंदा रखते हुए गंभीर कविताएं लिखी हैं। “एक रंग ठहरा हुआ”तथा “शांति पर्व” कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। आशीष ने रामचंद्र शुक्ल रचनावली के आठ खंडो का संपादन नामवर जी के साथ मिलकर किया है। अपने लगन, मेहनत और जिज्ञासा के कारण उन्होंने डॉ. नामवर सिंह के जीवन में दिए गए व्याख्यानों को संग्रहित किया इस संकलन का बारह खंडो में प्रकाशन हुआ है। आशीष त्रिपाठी को यह गौरवपूर्ण सम्मान मिलने से पूरे विन्ध्य अंचल के साहित्यिक जगत का सम्मान हुआ है। प्रगतिशील लेखक संघ जिला इकाई सीधी की ओर से अध्यक्ष सोमेश्वर सिंह, सहित अन्य साथी प्रो.अनिल कुमार सिंह सत्यप्रिय, डॉ. शिव शंकर मिश्रा सरस, जगदीश मिश्रा, महेंद्र सिंह गौतम, संतोष तिवारी, रावेन्द्र शुक्ला,अशोक तिवारी अकेला, रामराज यादव ने उन्हें बधाई देते हुए शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

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