जवारा महोत्सव के द्वितीय दिवस पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ महोत्सव हुआ शुभारंभ

जवारा महोत्सव में लोक कलाकारों की रही विशेष सहभागिताभगत गायन के साथ देर तक झूपते रहे कुल देवी देवतासीधी। जवारा महोत्सव के द्वितीय दिवस मंगलवार की शाम इन्द्रवती लोक कला ग्राम भमरहा में रामसुंदर साकेत के घर के समीप पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ महोत्सव का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर की गई, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महोत्सव के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित इस कार्यक्रम ने ग्राम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से अनुष्ठान में सहभागिता कर परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर लोक कलाकारों की विशेष सहभागिता रही, जिन्होंने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। प्रमुख रूप से रामसुंदर साकेत, रामदास साकेत, राजबली साकेत, महाबली साकेत, सूर्यबली साकेत, प्रजीत कुमार साकेत, सूरज साकेत, परमेश्वर साकेत, बृजेश साकेत, संदीप साकेत, इंद्रजीत साकेत एवं बैजनाथ साकेत ने सक्रिय भागीदारी निभाई। भगत गीत गायन के साथ बारी बारी से अलग अलग बरुआ के सिर में आकर देर तक कुल देवी देवता झूपते रहे तथा श्रद्धालुओं की पीड़ा दूर करते रहे। कार्यक्रम में उपस्थित जनसमुदाय ने भक्ति भाव से अनुष्ठान में भाग लेते हुए क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। महोत्सव के आगामी दिनों में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की तैयारी भी की गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना हुआ है।कार्यक्रम का स्थानीय प्रबंधन रामसुंदर साकेत के नेतृत्व में किया गया, जिसमें प्रजीत कुमार साकेत का विशेष सहयोग रहा। वहीं, समन्वयन रोशनी प्रसाद मिश्र द्वारा एवं संपूर्ण परिकल्पना नीरज कुंदेर द्वारा की गई, जिससे आयोजन सफल एवं सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।



