सिंगरौली

13 साल में नहीं बने 3 शासकीय भवन, एनएच विस्तार में आए थे पंचायत, स्वास्थ्य और पशु औषधालय भवन

• एमपीआरडीसी और ठेकेदार की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

सीधी-सिंगरौली राष्ट्रीय राजमार्ग 39 के किनारे बसे करथुआ क्षेत्र में विकास कार्यों की हकीकत चौंकाने वाली है। वर्ष 2012 में जब इस मार्ग को फोरलेन करने की स्वीकृति मिली, तब लाखों रुपये की लागत से बने ग्राम पंचायत भवन, उप स्वास्थ्य केंद्र और पशु औषधालय भवन सड़क चौड़ीकरण की जद में आ गए। नियमानुसार इन भवनों का पुनर्निर्माण संबंधित एजेंसियों द्वारा कराया जाना था, लेकिन 13 साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। जानकारी के अनुसार प्रभावित भवनों को दोबारा बनाने की जिम्मेदारी म.प्र. रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन अथवा ठेकेदार गैमन इंडिया कंपनी को सौंपी गई थी। गैमन इंडिया का टेंडर निरस्त होने के बाद टीबीसीएल कंपनी को काल मिला और उसे कार्य कराना था। इसके बावजूद न तो समय पर कार्य पूरा हुआ और न ही ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं मिल पाईं। यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और समन्वय की कमी को उजागर करती है। गौरतलब है कि ग्राम पंचायत भवन का निर्माण बाद में शासन द्वारा राशि स्वीकृत कर पुन: करा दिया गया, लेकिन उप स्वास्थ्य केंद्र और पशु औषधालय भवन आज भी अधूरे पड़े हैं। भवन के अभाव में उप स्वास्थ्य केंद्र करथुआ के एक छोटे कमरे में संचालित हो रहा है, जहां पर्याप्त जगह और संसाधनों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतरी हुई हैं। मरीजों को न तो समुचित जांच की सुविधा मिल पा रही है और न ही इलाज की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध हो पा रही है। इसी तरह पशु औषधालय की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। यह भर्रा के एक कमरे में अस्थायी रूप से संचालित हो रहा है, जहां सीमित संसाधनों के कारण पशुओं का समुचित उपचार नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों को अपने मवेशियों के इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक और व्यावहारिक दोनों तरह की परेशानियां बढ़ रही हैं।

टेंडर के बाद भी जमीन विवाद बना सबसे बड़ी बाधा-

सूत्रों के अनुसार इन दोनों भवनों के निर्माण के लिए लगभग एक वर्ष पूर्व टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी और कार्य भी आवंटित कर दिया गया था। इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसका मुख्य कारण करथुआ पंचायत मुख्यालय में शासकीय भूमि का व्यवस्थित रूप से उपलब्ध न होना बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर लिया गया है, जिससे निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है। इस पूरे मामले में राजस्व विभाग की निष्क्रियता भी सामने आई है। जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

ग्राम पंचायत सक्रिय, शासन-प्रशासन सुस्त !

चर्चाओं के मुताबिक ग्राम पंचायत सक्रिय है। कई बार लिखा-पढ़ी भी की गई, जब जाकर शासन-प्रशासन की नींद खुली और भवनों के निर्माण के लिए टेंडर कराया गया, लेकिन एक साल से प्रशासन भी मौन है । इधर करथुआ पंचायत के कई ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही अतिक्रमण हटाकर भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई, तो विकास कार्य और लंबित होते जाएंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर भवन निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो सकें। करथुआ क्षेत्र में अधूरे पड़े ये शासकीय भवन व्यवस्था की कमजोरियों का प्रतीक बन चुके हैं। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग कब तक सक्रिय होकर इस समस्या का समाधान करते हैं और ग्रामीणों को उनका हक दिलाते हैं।

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