प्रदेश को जिले से मिलता है सबसे अधिक राजस्व:विकास की राह में बजट का अभाव, योजनाएं अधर में लटकी

सिंगरौली । प्रदेश की उर्जाधानी के नाम से विख्यात सिंगरौली जिले में काले हीरे के साथ सोने का भी उत्पादन हो रहा है। कोयले की प्रचुर मात्रा में उत्पादन की वजह से इस इलाके में बिजली बनती है। उसकी आपूर्ति देश विदेश में की जाती है। इस जिले से सरकार के खजाने में सबसे अधिक राजस्व मिलता है।हम शहर या इस जिले की विकास की बात करें तो सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने वाला यह जिला पिछड़ेपन का दंश झेल रहा है। विकास के मामले में सबसे बड़ी मुसीबत बजट की है। बजट के अभाव में कई विकास योजनाओं की फाइल कागजों में ही दम तोड़ रही है। शहर से लेकर गांव तक जिले की तस्वीर बदलने के लिए प्रशासन की ओर से वैसे तो कई योजनाएं बनाई हैं, लेकिन बजट की बाधा के चलते योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं।नतीजा एक ओर जहां वैढ़न शहर का विस्तार प्रभावित हो रहा है। सिंगरौली को सिंगापुर बनाने का वादा भी अधूरा है। जिले के लिए बजट का अभाव इस स्थिति का कारण है, जबकि यहां से प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व जाता है।
डीएमएफ में 750 करोड़ रुपए से अधिक रकम
विकास कार्यों की ये तस्वीर बजट के अभाव में अधर में हैं। जबकि जिले से केवल डीएमएफ में 750 करोड़ से अधिक की रकम दी जाती है। बाकी अन्य मदों के राजस्व की बात करें तो 4000 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व शासन को सिंगरौली से जाता है।
अधर में ये योजनाएं
शहर में प्रशासन की ओर से सिविल लाइंस बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया है, लेकिन यह सपना भी अधूरा है। तय योजना के मुताबिक पचौर में सिविल लाइंस की योजना है। वहां ऑफीसर्स कॉलोनी से इसकी शुरुआत होनी है, वित्तीय मंजूरी के अभाव में योजना चर्चा से बाहर है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम
प्रशासन की ओर से पूर्व में जिला खनिज प्रतिष्ठान मद के दम पर पचौर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम बनाए जाने की योजना है, लेकिन यह योजना पर ठंडे बस्ते में हैं। वर्तमान में इस पर चर्चा बंद कर दी है। वजह बजट का बंदोबस्त नहीं हो पाना है।

फोरलेन को मंजूरी नहीं
बरगवां से लेकर परसौना होते हुए माड़ा तक फोरलेन सड़क की प्रस्ताव शासन में मंजूरी का इंतजार कर रहा है। देवसर विधायक के इस प्रस्ताव को स्वीकृति तो मिल गई है। साढ़े छह सौ करोड़ से अधिक बजट वाली इस योजना की फाइल वित्त के अभाव में लंबित है।
बाइपास सड़क
शहर में यातायात पर वाहनों का दबाव कम हो सके। परसौना-जयंत तक बाइपास सड़क का निर्माण कराया जाना है। पांच वर्ष में तीन बार एजेंसियां बदली, अभी बाइपास निर्माण का मामला फाइनल नहीं हो सका है। एजेंसी पीडब्ल्यूडी ने 350 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया है, बजट अधिक बता प्रस्ताव को स्वीकृत नहीं दी जा रही है।
औद्योगिक क्षेत्र का विकास नहीं
मप्र राज्य औद्योगिक विकास निगम की ओर से बरगवां सहित आसपास के इलाकों में 250 हेक्टेयर से अधिक जमीन औद्योगिक क्षेत्र के रूप में चिह्नित की है। एमपीएसआइडीसी को यह जमीन आवंटित भी कर दी है। आगे की योजना चिह्नित क्षेत्र को विकसित कर उद्यमियों को प्लाट आवंटित करना है, लेकिन बजट की स्वीकृति नहीं मिलने से क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को विकसित कर पाना नामुमकिन नहीं हो पा रहा है।
बजट की स्वीकृति शासन स्तर से लंबित-कलेक्टर
इस मामले में सिंगरौली कलेक्टर अरुण परमार ने कहा कि पूर्व में लंबित विकास कार्यों के लिए बजट की स्वीकृति शासन स्तर से लंबित है। पहले जो महत्वपूर्ण है प्राथमिकता के आधार पर कार्य किए जा रहे हैं। पूर्व में लंबित कार्यों को भी अमल किया जाएगा, जिससे जिले का सम्पूर्ण विकास हो सके।



