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एपीएमडीसी के खिलाफ डोंगरी में सडको पर विस्थापितों ने घंटों लगाया जाम

सिंगरौली-जिले के तहसील सरई क्षेत्र में आने वाले डोंगरी कोल ब्लॉक के पास गुरुवार को विस्थापितों ने जमकर बवाल किया। अपनी मांगों को लेकर आक्रोशित विस्थापितों की ओर से सडक़ पर जाम लगा दिया और कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी, वे वहां से नहीं हटेंगे। कोयला परिवहन में लगे डंपर सहित अन्य वाहनों की सडक़ पर लंबी लाइन लगने की सूचना पर पहुंची लंघाडोल पुलिस ने उन्हें समझाइस दी, लेकिन विस्थापित अपनी मांग पर अड़े रहे।

विगत दिवस सुबह करीब 10 बजे से शुरू हुआ जाम दोपहर दो बजे के बाद तक जारी रहा। स्थिति को अनियंत्रित होते देख पुलिस ने सख्त रूख अपनाया तो विस्थापित उग्र हो उठे। इस बीच झड़प भी हुई, लेकिन पुलिस की सख्ती के चलते विस्थापितों को वहां से हटना पड़ा। विस्थापितों का कहना है कि कंपनी के साथ पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत उन्हें उनके अधिकार पाने से वंचित कर रही है। गौरतलब है कि डोंगरी में एपीएमडीसी की कोल माइंस संचालित है और विस्थापितों की मांग भी इसी कंपनी से है।

अधिकारियों द्वारा पूर्व में किया वादा नहीं हुआ पूरा

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के डोंगरी गांव में कोल ब्लॉक से कोयला खनन का ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने पूर्व में 22 नवंबर 2022 मंगलवार की शाम को कोयला परिवहन कर रहे वाहनों को रोक दिया। सूचना पर क्षेत्र के अफसर मौके पर पहुंचे, जहां पर सरई तहसीलदार जितेंद्र वर्मा के तीखे तेवर भी देखने को मिले। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को जेल में डालने की धमकी दे डाली। तहसीलदार द्वारा दी जा रही धमकी का वीडियो भी सामने आया था।

सिंगरौली जिले में आंध प्रदेश सरकार की कंपनी आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (APMDC) को यहां सुलियरी कोल ब्लॉक आवंटित है। एपीएमडीसी ने बिना भू अर्जन प्रक्रिया पूरी किए ही कोल ब्लॉक में डोंगरी गांव से कोयला खनन की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। जिस वजह से वहां के ग्रामीण आदिवासी बीते कई दिनों से धरने पर बैठे हैं।

यह है मामला दरअसल एपीएमडीसी कोल ब्लॉक के विस्थापित उचित मुआवजा सहित अन्य मांगों को लेकर विस्थापित ग्रामीण आदिवासी खनन का विरोध कर रहे हैं और बीते कई दिनों से धरने पर बैठे है। बताया जा रहा है कि कंपनी द्वारा बिना भू अर्जन की प्रक्रिया पूरी किये बिना ही खदान से कोयले का खनन किया जा रहा है और उत्पादित कोयले को सड़क मार्ग से परिवहन कर बिजली कंपनियों को भेजा जा रहा है, जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान विस्थापितों ने स्थानीय प्रशासन पर मिलीभगत और वादाखिलाफी का आरोप लगाया। कहना है कि पूर्व 22 नवंबर 2022 को प्रदर्शन के दौरान मौके पर पहुंचे उपखंड अधिकारी, नायब तहसीलदार, थाना प्रभारी व कंपनी के अधिकारियों ने वादा किया था कि उनकी मांग पूरी की जाएगी, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया। अधिकारियों के आश्वासन पर ही 18 दिनों तक चला धरना प्रदर्शन स्थगित किया गया था।

इन प्रमुख मांगो को लेकर ग्रामीणों ने शुरू किया था धरना

सभी विस्थापित परिसर से एक व्यक्ति को एपीएमडीसी कंपनी में नौकरी दी जाए, सभी प्रभावित विस्थापितों को शत-प्रतिशत मुआवजा देने के बाद कार्य शुरू किया जाए। विस्थापित कालोनी में स्कूल, अस्पताल, बिजली, पानी सहित अन्य सुविधाएं दी जाए। सुलियरी कोल माइंस से प्रभावित गांवों के लोगों को विस्थापन कार्ड जारी किया जाए। जिनकी जमीन खाली की जा रही है, उनको कब्जा के समय एक मुश्त राशि दी जाए। विस्थापितों को पिछले 10 महीने का एरियर भत्ता व पेंशन का तत्काल भुगतान किया जाए। डोंगरी से खनुआ तक कंपनी द्वारा कोयला परिवहन के लिए स्वयं की सडक़ बनाई जाए।

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