राजनीतिक दलों और बीएलओ को 2023 की भी मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाए- प्रदीप

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के राजनीतिक प्रशिक्षक एवं संभागीय प्रवक्ता प्रदीप सिंह दीपू ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में निर्वाचन आयोग से मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को 2003 की मतदाता सूची तत्काल मुहैया कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को प्रभावी और सफल बनाने के लिए आवश्यक है कि बूथ लेवल अधिकारी और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को प्रत्येक मतदान केंद्र की 2025 के साथ 2023 की भी मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाए। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मध्य प्रदेश में पिछले 4 नवंबर से एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन चुनाव आयोग की तैयारी और व्यवस्था पूरी तरह से आधी अधूरी और अव्यवस्थित। नियम के अनुसार 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक बीएलओ तीन बार घर घर जाएंगे और वोटर का परिगणना फार्म भरवा कर वेरिफिकेशन करेंगे। वोटर का वेरिफिकेशन 2003 की मतदाता सूची और वोटर के उम्र के आधार पर होनी है।अर्थात सब कुछ 2003 की मतदाता सूची के आधार पर ही तय होगा। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि अभी तक एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी बीएलओ को न 2003 की वोटर लिस्ट दी गई है और ना ही परिगाना फॉर्म दिया गया है। कहीं भी बीएलओ किसी भी घर में अभी तक जाकर मतदाताओं का वेरिफिकेशन नहीं किए हैं। ऐसी स्थिति में निर्धारित समय सीमा में एसआईआर का कार्य संपन्न होना असंभव दिख रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जब 2003 की वोटर लिस्ट से ही मतदाताओं को अपना क्रम संख्या भाग संख्या इत्यादि विवरण भरना है, तब बीएलओ और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को 2003 की मतदाता सूची क्यों नहीं उपलब्ध कराई गई है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मध्य प्रदेश में दूर दराज आदिवासी अंचल के ग्रामीण लोग इतने सक्षम नहीं है कि वो चुनाव आयोग की वेबसाइट से 2003 की मतदाता सूची सर्च करके अपना विवरण निकल सके। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की वेबसाइट में कभी सरवर ही नहीं मिलता। हमेशा बंद रहती है। ऐसी स्थिति में वेबसाइट से मतदाता सूची सर्च करके विवरण निकालने की जवाबदारी मतदाताओं पर डालना न केवल सरासर अन्याय है बल्कि यह जनता के वोट देने के अधिकार पर भी अप्रत्यक्ष रूप से हमला है। कांग्रेस प्रवक्ता प्रदीप सिंह ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि बीएलओ और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को 2025 एवं 2003 की मतदाता सूची की हार्ड कॉपी तत्काल उपलब्ध कराई जाए। ताकि निर्धारित समय पर एसआईआर की प्रक्रिया संपन्न हो सके और निष्पक्ष और पारदर्शी मतदाता सूची बन सके। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची बनाना और मतदाताओं का मतदाता सूची में नाम जोड़ना यह चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। लेकिन पता नहीं किस मानसिकता से और किसके दबाव मैं आकर चुनाव आयोग संपूर्ण जिम्मेदारी मतदाताओं के ऊपर डालकर जनता को परेशान करने का षड्यंत्र कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से एसआईआर की कार्यवाही चल रही है यदि इसी तरह चलती रही तो बड़ी संख्या में ग्रामीण खासकर हरिजन आदिवासी पिछड़े वर्ग एवं गरीब मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से कट जाएगा और उनके वोट देने के लोकतांत्रिक अधिकार की हत्या हो जाएगी।


