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न्यायिक प्रक्रिया सरल और सुलभ होनी चाहिए- रामगोपाल

सीधी । राष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामगोपाल गुप्ता का चंबल एवं ग्वालियर संभाग के प्रादेशिक दौरे पर संभाग के राष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने मुरैना में सम्मान समारोह का आयोजन बीआई गार्डन में किया। जिसके मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष रामगोपाल गुप्ता, अध्यक्षता राष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ श्रीमती आशा गुप्ता एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती रागिनी मिश्रा ,प्रदेश महामंत्री संतोष शर्मा, ग्वालियर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अभिभाषक एवं राष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच ग्वालियर खंडपीठ के संरक्षक पूरन चंद खत्री थे ।कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती के चरणों में दीप प्रज्वलित कर किया गया। सभी राष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच के प्रदेश से आए पदाधिकारियों ने संगठन के संबंध में एवं अधिवक्ताओं के समस्याओं के संबंध में उद्बोधन दिये। सभी के संबोधन के बाद राष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामगोपाल गुप्ता को शाल एवं श्रीफल से सम्मानित किया गया ।साथ ही मंचासीन पदाधिकारियों को भी मुरैना संभाग के पदाधिकारियों ने साल श्रीफल से सम्मानित किया। उसके पश्चात मंचासीन पदाधिकारियों ने देश से आए हुए सभी सम्मानित अधिवक्ता साथियों को साल श्रीफल देकर सम्मानित किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गुप्ता ने राष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच के संगठन विस्तार एवं उद्देश्यों के संबंध में जानकारी दी तथा उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि न्यायिक प्रक्रिया सरल सुलभ होनी चाहिए। अपने देश का कानून बहुत पुराना हो चुका है उसके संशोधन की आवश्यकता है। अन्य देशों के कानून कड़े हैं जिससे अपराध कम होता है। अपने देश में संसद एवं विधायिका कानून बनाती है लेकिन संसद एवं विधायिका में विधि वेताओं की कमी हैं इसलिए अच्छे कानून नहीं बन पा रहे हैं। पुराने कानून में संशोधन नहीं हो पा रहे हैं जो आज के परिवेश में आवश्यक है। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने भी चिंता जाहिर की है कि पूर्व में संसद में एवं विधायिका में कानून के जानकार लोग पहुंचते थे अच्छी बहस होती थी जिससे अच्छे कानून बनाए जाते थे लेकिन वर्तमान में संसद एवं विधायिक में योग्यता का अभाव है । संसद एवं विधायिका में कानून का ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों को पहुंचना चाहिए जो नहीं पहुंच पा रहे हैं जिसके कारण न्याय व्यवस्था चरमरा रही है। अब अधिवक्ताओं को जागरूक होना चाहिए और उन्हें अपने अधिकारों के लिए संसद एवं विधायिका में पहुंचना होगा जिसके लिए 25 प्रतिशत का आरक्षण की मांग करनी चाहिए।भारत सरकार एवं प्रदेश सरकारों को अधिवक्ता के लिए अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट शीघ्र लागू करना चाहिए। सरकार अधिवक्ताओं के हित में कार्य करें और शीघ्र प्रोटेक्शन एक्ट लागू करे नहीं तो हम सभी अधिवक्ताओं को उसका विरोध करना होगा और अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा । अधिवक्ताओं को आयुष्मान कार्ड की सुविधा, 60 वर्ष के ऊपर के अधिवक्ताओं को पेंशन योजना, नये अधिवक्ताओं को 5 साल तक 10 हजार रुपए मासिक भत्ता देना चाहिए। ग्रुप इंश्योरेंस की सुविधा बीमा योजना शीघ्र लागू करें । सरकार अधिवक्ता हित में कार्य नहीं करें तो जिन
जनप्रतिनिधियों को कानून का ज्ञान नहीं है उन्हें संसद में एवं विधायिका में जाने से रोकना होगा और उनका भी विरोध करना होगा तभी अधिवक्ताओं को अधिकार मिलेगा, संघर्ष करना होगा। अंत में राष्ट्रीय संयुक्त अधिवक्ता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामगोपालदास गुप्ता ने संतोष शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा और उन्हें शाल एवं श्रीफल से सम्मानित किया।

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