श्रीमद् भागवत कथा में छठवें दिन महारास की भक्ति में सराबोर हुआ सरई

• श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग ने बांधा श्रद्धा का समां
सिंगरौली जिले के नगर परिषद सरई अंतर्गत थाना रोड स्थित वार्ड क्रमांक 4 में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के छठवें दिवस शनिवार को भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह का दिव्य प्रसंग अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। कथा स्थल पर भक्ति की ऐसी रसधारा बही कि श्रद्धालु भावविभोर होकर कृष्णमय वातावरण में डूब गए। व्यासपीठ से कथावाचिका चित्रा शुक्ला जी ने महारास लीला का भावपूर्ण वर्णन करते हुए रुक्मिणी हरण और श्रीकृष्ण विवाह की अलौकिक कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि महारास केवल एक लीला नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी की मधुर तान पर गोपियों का समर्पण, आत्मा के परम सत्य से जुड़ने का संदेश देता है। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा प्रस्थान, कंस वध, महर्षि संदीपनी आश्रम में विद्याध्ययन, कालयवन वध, उद्धव-गोपी संवाद, द्वारका स्थापना और रुक्मिणी विवाह जैसे प्रसंगों का संगीतमय प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रत्येक प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं के मन को भक्ति से भर दिया। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी की मनोहारी झांकी सजाई गई। भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने नाचते-गाते बारात निकाली। पुष्प और गुलाल की वर्षा से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। भगवान को विशेष वेशभूषा से अलंकृत किया गया, जिसने वातावरण को और दिव्यता प्रदान की। इस धार्मिक आयोजन की मुख्य आयोजक एडवोकेट गोमती जायसवाल एवं एडवोकेट जावित्री जायसवाल रहीं। कथा में समाजसेवी प्रेम सिंह भाटी, रमापति जायसवाल, डॉ. गंगा जायसवाल, माखनलाल प्रजापति सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।




